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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/५३९

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बबूल बबूल -संज्ञा पुं० मझेाले कुद का एक प्रसिद्ध कांटेदार पेड़ | बबूला - संज्ञा पुं० १. दे० " बगूला" । २. दे० "बुलबुला " । बभूत-संज्ञा स्त्री० दे० "भभूत" या "विभूत" । बम - संज्ञा पुं० विस्फोटक पदार्थों से भरा हुआ लोहे का बना वह गोला जो शत्रुओं पर फेंकने के लिये बनाया जाता है । संज्ञा पुं० शिव के उपासकों का "बम", "बम" शब्द | सज्ञा पुं० बग्गी, फिटन आदि में आगे की ओर लगा हुआ वह लंबा बस जिसके साथ घोड़े जाते जाते हैं । बमकना - क्रि०भ० बहुत शेखी हाँकना । बमपुलिस - संज्ञा पुं० दे० "बं पुलिस " । बयस - संज्ञा स्त्री० दे० "वय" । बयस सिरेमिनि-संज्ञा पुं० युवा- वस्था । 1 बया -संज्ञा पुं० गौरैया के आकार और रंग का एक प्रसिद्ध पक्षी । संज्ञा पुं० वह जो अनाज तौलने का काम करता हो । बयान- संज्ञा पुं० १. बखान । हाल । बयाना -संज्ञा पुं० पेशगी । क्रि० प्र० बकना । करना । २. ५३१ अव्य० ऊपर । बि० श्रेष्ठ ।

  • अव्य० बल्कि |

बरतना बरई + -संज्ञा पुं० [ स्त्री० बरइन ] पान पैदा करने या बेचनेवाला तमोली । बरकत - संज्ञा स्त्री० १. बढ़ती । २. लाभ | ३ धन-दै लत । ४. प्रसाद । बरकना-क्रि० अ० १. निवारण २. हटना । होना । बरकरार - वि० १. कायम । २. १. कोई बुरी उपस्थित । बरकाज-संज्ञा पुं० विवाह । बरकाना +- क्रि० प्र० बात न होने देना । २. बहलाना । बरखा - संज्ञा स्त्री० दे० "वर्षा" । बरखास: + - वि० दे० " बरखास्त " | बरखास्त - वि० १. जिसका विसर्जन कर दिया गया हो । २. मैकूफ़ । वरगद - संज्ञा पुं० बड़ का पेड़ । बरछा - संज्ञा पु० [ खी० बरछी ] भाला नामक हथियार । । बरछैत - संज्ञा पुत्र बरछा चल्लानेवाला । बरजन + - क्रि० प्र० मना करना । बरजनि - संज्ञा स्त्री० १. मनाही । २. रुकावट । बरज़बान - वि० कंठस्थ | ऊटपटाँग बातें बरज़ोर - वि० १. बलवान् । बयार, बयारि--संज्ञा बी० हवा | बर - संज्ञा पुं० १. दूल्हा । दे० "वर" | २. श्राशीर्वाद-सूचक वचन । बि० श्रेष्ठ । संज्ञा पुं० बल । संज्ञा पुं० वट वृक्ष । संज्ञा पुं० रेखा । अत्याचारी | क्रि० वि० ज़बरदस्ती । । २. बरज़ोरी -संज्ञा श्री० ज़बरदस्ती । क्रि० वि० ज़बरदस्ती से । 1 बरत - संज्ञा पुं० दे० "व्रत" । संज्ञा स्त्री० रस्सी । । बरतन - संज्ञा पुं० पात्र । भाँड़ा। बरतना - क्रि० प्र० व्यवहार करना ।