बरहीमुख संज्ञा खी० प्रसूता का वह स्नान तथा अन्यान्य क्रियाएँ जो संतान उत्पन्न होने के बारहवें दिन होती हैं । संज्ञा स्त्री० पत्थर श्रादि भारी बोक उठाने का मोटा रस्सा | बरही मुख -संज्ञा पुं० देवता | संज्ञा पु० भुजदंड पर पहनने का एक आभूरण । बराक-सा पु० १. शिव । २. युद्ध । वि० १. शेोचनीय । २ नीच | बराट - संग खो० कौड़ी । बरात मंशा खो० वर पक्ष के लोग - जो विवाह के समय वर के साथ कन्यावालां के यहाँ जाते हैं । बराती - मज्ञा पुं० बरात में वर के साथ कन्या के घर तक जानेवाला । बराना-क्रि० प्र० १. बचाना 1 २. रक्षा करना । क्रि० स० छांटना | ५३३ + क्रि० स० दे० "बालना" । ( जलाना ) । बराबर - वि० १. तुला । एक सा । २. समतल । क्रि० वि० १. लगातार । २. एक साथ । ३. हमेशा । बराबरी - संज्ञा स्त्रो० १. समानता । २. सादृश्य । ३. मुकाबला । बरामद - वि० खोई हुई, चोरी गई हुई या न मिलती हुई वस्तु जो कहीं से निकाली जाय । बरामदा - संज्ञा पुं० १. छज्जा । २. दालान । बरायन -संज्ञा पुं० लोहे का वह छला जो ब्याह के समय दूल्हे के हाथ में पहनाया जाता है । बराव - संज्ञा पुं० बचाव | वर्क बरास-संज्ञा पुं० एक प्रकार का कपूर । बरियाई | - क्रि० वि० बल - पूर्व रु । संगा खा० बलवान् होने का भाव । बरियारा - संज्ञा पुं० एक छोटा झाड़- दार छारा पौधा । बरिबंड - वि० दे० " बरबड" । बी-ज्ञा स्त्री० १. गोल टिकिया । २. उर्द या मूँग की पीठी के सुखाए हुए छोटे छोटे गोल टुकड़े । वि० मुक्त | बहा# अव्य० भले ही । सज्ञा पुं० दे० "वर" । बरु श्री -संज्ञा पुं० १. वटु । ब्रह्म- चारी । २. ब्राह्मण कुमार । बरुनी -संज्ञा स्त्री० पलक के किनारे पर के बाल | बरेखी - संज्ञा खो० स्त्रियों का भुजा पर पहनने का एक गहना । - संज्ञा खो० विवाह संबंध के लिये वर या कन्या देखना । विवाह की ठहरैनी । बराक-सा पुं० वह द्रव्य जो कन्या- पत्र से वरपक्ष को संबंध पक्का करने के लिये दिया जाता है ।
- मंज्ञा पुं० सेना ।
बरोठा - संज्ञा पुं० १. ड्योढ़ी । २. बैठक | बरोह - संज्ञा स्त्री० बरगद के पेड़ के ऊपर की डालियों में टैंगी हुई वह शाखा जो ज़मीन पर जाकर जम जाती है बरौठrt - संज्ञा पुं० दे० " बरोठा" बरौनी-संशा खो० दे० "बहनी" ! बक़ - संज्ञा खो० बिजली । वि० तेज़ | बर्जना- क्रि० स० दे० "बरजना"