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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/५४३

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बलाहक बलाहक-संज्ञा पुं० मेघ । बलि- संज्ञा पुं० १. कर । २. उपहार । ३. चढ़ावा । ४. वह पशु जो किसी देवता के उद्देश्य से मारा जाय । ५. प्रह्लाद का पैन जो दैत्यों का राजा था । संज्ञा स्त्री० सखी । बलित * - वि० १ बलिदान चढ़ाया हुश्रा । २. मारा हुआ । बलिदान - संज्ञा पुं० १. देवता के उद्देश्य से नैवेद्यादि पूजा की सामग्री चढ़ाना | २. बकरे श्रादि पशु देवता के उद्देश्य से मारना । बलिपशु-पंशा पुं० वह पशु जो किसी देवता के उद्देश्य से मारा जाय । बलिप्रदान- संज्ञा पुं० बलिदान । बलिबर्द - संज्ञा पुं० १. साँड़ । २ बैल | बलिष्ठ - वि० अधिक बलवान् । बलिहारी - संज्ञा खो० निछावर । बलो-वि बलवान् । बलीमुखक- संज्ञा पुं० बंदर | बलुना - वि० [स्त्री० बलुई ] जिसमें बालू मिला हो । • बलूची -संज्ञा पुं० बलूचिस्तान का निवासी । बलूत-संज्ञा पुं० माजूफल की जाति का एक पेड़ । बलैया - संश बी० बल्ला । बल्कि - अव्य० १. बेहतर | अन्यथा । २. बल्लम-संधा पुं० बरछा । बल्ल मटेर - संज्ञा पुं० स्वयंसेवक । बल्लमबर्दार-संज्ञा पुं० वह जो सवारी या बरात के साथ बलम लेकर चलता है 1 बल्ला-संा पुं० [ श्री० अल्पा० बल्ली ] ५३५ बलामा डंडे के आकार का लंबा 9. मोटा टुकड़ा । २. मोटा डंडा । ३. डाँड़ा । बल्ली -संज्ञा स्त्री० छोटा बल्ला संज्ञा स्त्री० दे० "बल्ली" । बवँड़ना+-क्रि० घूमना । अ० इधर-उधर बवंडर - संज्ञा पुं० १. बगूला । श्रधी । २. बघना - क्रि० स० १. दे० " बोना" । २. छितराना । क्रि० प्र० छितराना । संज्ञा पुं० दे० "वामन" । बवासीर - संज्ञा स्त्री० एक रोग जिसमें गुर्देद्रिय में मस्से उत्पन्न हो जाते हैं । बसंती - वि० १. वसंत का । ऋतु- संबंधी । २. खुलते हुए पीले रंग का । बसुंदर - संज्ञा पुं० भाग । बस - वि० भरपूर । काफ़ी । श्रव्य० १. पर्याप्त । २. सिर्फ । संज्ञा पुं० दे० "वश" । बसना - क्रि० भ० १ निवास करना । २. निवासियों से भरा पूरा होना । ३. टिकना । । क्रि० प्र० महक से भर जाना । संज्ञा पुं० १. वह कपड़ा जिसमें कोई वस्तु लपेटकर रखी जाय । २. थैली । बसवार - संज्ञा पुं० छौंक बसर - संज्ञा पुं० गुज़र । बसह-संज्ञा पुं० बैल । बसाना- क्रि० स० १. बसने के लिये जगह देना । २. आबाद करना । क्रि० अ० १. बसना। २. दुर्गंध देना। क्रि० स० १. बैठाना । २. रखना ।