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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/५४६

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बहुव्रीहि बहुव्रीहि-मंशा पु० व्याकरण में छः प्रकार के समासों में से एक जिसमें दो या अधिक पदों के मिलने से जो समस्त पद बनता है, वह एक अन्य पद का विशेषण होता है । बहुश्र ुत - वि० जिसने बहुत सी बातें सुनी हों । बहुसंख्यक - वि० गिनती में बहुत । अधिक बहू - संज्ञा स्त्री० १. पुत्रवधू । पतोहू । २. पत्नी । बहेड़ा - संज्ञा पुं० एक बड़ा और ऊँचा बहेड़ा-संज्ञा जंगली पेड़ जिसके फल दवा के काम में आते हैं बहेतू - वि० फिरनेवाला । बहेलिया - संज्ञा पुं० व्याध | चिड़ीमार । बहोरि - भव्य० पुनः । फिर । बाँ- संज्ञा पुं० गाय के बोलने का शब्द | इधर उधर मारा मारा बाँक- संज्ञा स्त्री० १. भुजदंड पर पहनने का एक आभूषण । २. एक प्रकार का चाँदी का गहना जो पैरों में पहना जाता है । ३. हाथ में पहनने की एक की पटरी या बड़ी चूड़ी । संज्ञा पुं० टेढ़ापन । वक्रता । वि० १. टेढ़ा । बांका। तिरछा । 1 घुमावदार | प्रकार । २. बाँकपन -संज्ञा पुं० १. टेढ़ापन । तिरछापन । २. छैलापन | बाँका - वि० १. टेढ़ा । तिरछा | २. बहादुर । ३. सुंदर और बना-ठना । बाँग-संज्ञा खी० १. पुकार। चिल्लाहट । २. वह ऊँचा शब्द या मंत्रोच्चारण ५३८ बाँधना जो नमाज़ का समय बताने के लिये मुल्ला मसजिद में करता है । प्रजान । बाँगड़-संज्ञा पुं० हिसार, रोहतक और करनाल का प्रांत । हरियाना । बाँगड़ - संज्ञा खो० बांगड़ प्रांत के जाटों की भाषा । हरियानी । बांगुर - संज्ञा पुं० पशुओं या पक्षियों को फँसाने का जाल । फेदा । बांचना + - क्रि० स० पढ़ना । बांछा - संज्ञा स्त्री० इच्छा | बांछित - वि० इच्छित । जिसकी इच्छा की जाय । बांछी - संज्ञा पुं० अभिलाषा करने- वाला । चाहनेवाला । बाँझ-संज्ञा खी० वह स्त्री या मादा जिसे संतान होती ही न हो । बंध्या । बाँझपन, बांझपना -संज्ञा पुं० बाँझ होने का भाव । बाँट - संज्ञा स्त्री० १. बटिने की क्रिया या भाव । २. भाग । बाँटना- क्रि० स० किसी चीज के कई भाग करके अलग अलग रखना । वितरण करना । बांटा -संज्ञा पुं० १. बाँटने की क्रिया या भाव। २ भाग । हिस्सा । बाँदर - संज्ञा पुं० बंदर | बाँदा -संज्ञा पुं० एक प्रकार की वनस्पत्ति जो अन्य वृक्षों की शाखाओं पर उगकर पुष्ट होती है। बाँदी - संज्ञा खी० लौंडी । दासी । बाँध-संज्ञा पुं० नदी या जलाशय श्रादि के किनारे मिट्टी, पत्थर आदि का बना धुस्स | बंद | बाँधना - क्रि० स० १. कसने या जक- ढ़ने के लिये किसी चीज़ के घेरे में