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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/५४८

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बाचाबंध २. प्रतिज्ञा । प्रण । बाचाबंध-वि० जिसने किसी प्रकार का प्रण किया हो । बाछा - संज्ञा पुं० १. गाय का बच्चा । बछड़ा । २. लड़का । बाज - संज्ञा पुं० १. एक प्रसिद्ध शिकारी पक्षी । २. फ़ारसी का एक प्रत्यय जो हिंदी में भी श्राता है । वि० वंचिन । रहित । वि० काई कोई | कुछ । बाजन - सज्ञा पुं० दे० " बाजा" । बाजना- क्रि० अ० १. बाजे श्रादि का बजना । २. लड़ना । झगड़ना । बाजरा - संज्ञा पुं० एक प्रकार की बड़ी घास जिसकी बालों के दानों की गिनती मोटे श्रन्नों में होती है । बाजा - संज्ञा पुं० कोई ऐसा यंत्र जो स्वर ( विशेषतः राग-रागिनी ) उत्पन्न करने अथवा ताल देने के लिये बजाया जाता हो । वाथ । वाज्ञान्ता- क्रि० वि० जाब्ते के साथ | नियमानुसार । वि० जो नियमानुकूल हो । बाज़ार-संज्ञा पुं० १. वह स्थान जहाँ अनेक प्रकार के पदार्थों की दूकाने हों । २. वह स्थान जहाँ किसी निश्चित समय या अवसर पर सब तरह की दूकानें लगती हों । हाट । पठ । बाज़ारी - वि० १. बाज़ार-संबंधी । २. मामूली । साधारण । ३. शिष्ट । बाज़ारू - वि० दे० "बाज़ारी” । बाजि - संज्ञा पुं० घोड़ा । बाज़ी -संज्ञा स्त्री० ऐसी शर्त जिसमें reo बाढ़ हार-जीत के अनुसार कुछ लेन-देन भी हो । शर्त । दवि । बाज़ीगर - संज्ञा पुं० जादूगर वाजु - अव्य० १. २ अतिरिक्त । बदान । । बिना । बगैर । सिवा । बाजू-संज्ञा पु० १. भुना । बाहु | गहना । बाँह । २. बाजूबंद नाम का बाजूबंद - संज्ञा पु० बाँह पर पहनने का एक प्रकार का गहना । बिजायठ | बाजू । बाझन: -संज्ञा स्त्री० बम्कने या फँसने फँसावट | का भाव । बाट-संज्ञा पुं० 1 २ बटखरा । मार्ग | रास्ता ३. पत्थर का वह टुकड़ा जिससे सिख पर कोई चीज पीसी जाय । बट्टा । C फुज - । बाटना- क्रि० त० सिल पर बट्टे आदि से पीपना। चूर्ण करना । बाटिका - संज्ञा स्त्री० बाग़ । वरी । बाटी - संज्ञा स्त्री० श्रंगारों या उपले आदि पर सेंकी हुई एक प्रकार की रोटी । अँगाकड़ी | बिट्टी । बाड़व-संज्ञा पुं० बढ़वाभि । बाड़वानल - संज्ञा पुं० दे० " बढ़वानल"। बाड़ा-संज्ञा पुं० चारों ओर से घिरा हुधा कुछ विस्तृत खाली स्थान । बाड़ी + - संज्ञा स्त्री० वाटिका | बाढ़ - संज्ञा स्त्री० १. बढ़ाव । २. अधिक वर्षा आदि के कारण नदी या जला- शय के जल का बहुत अधिक मान में बढ़ना | सैलाब | ३. बंदूक या तोप आदि का लगातार छूटना ! संज्ञा स्त्री० तलवार, छुरी आदि शस्त्रों की धार । सान ।