बालापन बालापन + - संज्ञा पुं० दे० "बालपन"। बालार्क - संज्ञा पुं० १. प्रातःकाल का २. कन्या राशि में स्थित सूर्य । सूर्य । बालि -संज्ञा पुं० पंग, किष्किंवा का बानर राजा जो श्रगद का पिता और सुग्रीव का बड़ा भाई था । बालिका - संज्ञा स्त्री० १. छोटी लड़की । कन्या । २. पुत्री । बालिग सज्ञा पुं० वह जो बाल्यावस्था को पार कर चुका हो । प्राप्त वयस्क । बालिश-संज्ञा स्त्री० तकिया । - जवान । बालिश्त संज्ञा पुं० दे० "बित्ता" । बाली-संज्ञा स्त्री० कान में पहनने का एक प्रसिद्ध श्राभूषण । संज्ञा स्त्री० जौ, गेहूँ श्रादि के पौधों की बाल । । संज्ञा पुं० दे० " बालि" । बालुका - संज्ञा स्त्री० रेत | बालू । बालू-संज्ञा पुं० चट्टानां श्रादि का वह बहुत ही महीन चूर्ण जो वर्षा के जल के साथ पहाड़ों पर से बह आता है और नदियों के किनारों पर. अथवा ऊसर ज़मीन या रेगिस्तानों में बहुत पाया जाता है । रेणुका । रेत | बालूदानी -संज्ञा स्त्री० एक प्रकार की फरीदार डिबिया जिसमें लोग बालू रखते हैं । इस बालू से स्याही सुखाने का काम लेते हैं । बालूसाही - संज्ञा स्त्री० एक प्रकार की मिठाई । बाल्य - संज्ञा पुं० १. लड़कपन । २. बालक होने की अवस्था । ३५ ५४५ बास बाल्यावस्था - संज्ञा खी० प्राय: सोलह सत्रह वर्ष तक की अवस्था । लड़कपन । बाघ - संज्ञा पुं० १. वायु। हवा । २. बाई | ३. अपान वायु । बावड़ी - सा स्त्री० दे० " बावली" । बाघन-सज्ञा पुं० दे० " वामन" । संज्ञा पु० पचास और दो की संख्या । ५२ । बावरची- संज्ञा पुं० बाबा | रसोइया । बाघरचीखाना- संज्ञा पकाने भोजन पकाने- ( मुसल० ) पुं० भोजन का स्थान। रसोईघर । ( मुसल० ) बावरा - वि० दे० " बावला" । बावला - वि० १. पागल । विचिप्त । सनकी । २. मूर्ख । पुं० पागलपन | बावलापन - संज्ञा सिड़ीपन | झक । बावली -संज्ञा बी० १. नौड़े मुँह का कुश्र जिसमें पानी तक पहुँचने के लिये सीढ़ियाँ बनी हों । २. छोटा गहरा तालाब । बाशिंदा -संज्ञा पुं० निवासी । बाष्प - संज्ञा पुं० १. भाप । २. लोहा । भाव । महक । ३. अश्रु । श्रस् । बासंतिक - वि० बसंत ऋतु संबंधी । बास - संज्ञा पुं० १. रहने की क्रिया या निवास । २. बू । गंध । ३. एक छंद का नाम । संज्ञा स्त्री० वासना । इच्छा । संज्ञा पुं० छोटा कपड़ा संज्ञा स्त्री० १. अभि । भाग । २. एक प्रकार का अस्त्र । ३. तेज़ धार- वाली छुरी, चाकू, कॅची इत्यादि |
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