बिछुभा बिहुला -संज्ञा पुं० १. पैर में पहनने का एक गहना । २. एक प्रकार की छुरी । ३. एक प्रकार की करधनी । बिछुड़न | संज्ञा स्त्रो० बिछुड़ने या अलग होने का भाव । बिछुड़ना- क्रि० प्र० ९. अलग होना । जुदा होना। २. प्रेमियों का एक दूसरे से अलग होना । वियोग होना । बिधुरना- क्रि० प्र० दे० "बिछुड़ना" । बिछूना - संज्ञा पुं० बिछड़ा हुआ । जो बिछड़ गया हो । बिछोड़ा - संज्ञा पुं० १. बिछड़ने की क्रिया या भाव। २. विरह | बिछोय, बिछोह -संज्ञा पुं० बिछोड़ा । जुदाई | विरह | वियोग | बिछौना - संज्ञा पुं० वह कपड़ा जो बिछाया जाता हो । बिछावन । बिस्तर | बिजन -संज्ञा पुं० छोटा बेना । पंखा । ५४६ वि० एकांत स्थान । वि० जिसके साथ कोई न हो । बिजयसार - संज्ञा पु० एक प्रकार का बहुत बड़ा जंगली पेड़ । बिजली - संज्ञा स्त्री० १. एक प्रसिद्ध शक्ति जिसके कारण वस्तुनों में आकर्षण और अपकर्षण होता है और जिससे कभी कभी ताप और प्रकाश भी उत्पन्न होता है। विद्यत् । २. आकाश में सहसा उत्पन्न होने वाला वह प्रकाश जो एक बादल से दूसरे बादल में जानेवाली वातावरण की बिजली के कारण उत्पन्न होता है । चपला । ३. आम की गुठली के अंदर की गिरी । बिट्ठल विo बहुत अधिक चंचल या तेन । बिजाती - वि० दूसरी जाति का । बिजायठ-संज्ञा पुं० बाँह पर पहनने का बाजूबंद । बाजू । बिजूका, बिजूखा-संज्ञा पुं० खेतों में पक्षियों आदि को डराकर दूर रखने के उद्देश्य से लकड़ी के ऊपर उलटी रखी हुई काली हांड़ी । बिजोग * +-संज्ञा पुं० दे० "वियोग"। बिजोरा -संज्ञा पुं० नीबू की जाति का एक वृक्ष । इसके फल बड़ी नारंगी के बराबर होते हैं । बिज्जु -संज्ञा स्त्री० दे० " बिजली" । बिज्जुपात -संज्ञा पुं० बिजली गिरना । वज्रपात । बिज्जुल -संज्ञा पुं० स्वचा । छिलका । संज्ञा स्त्री० बिजली । बिज्जू-संज्ञा पुं० बिल्ली के आकार-प्रकार का एक जंगली जानवर । बिज्जूहा- संज्ञा पुं० एक वर्णिक वृत्त । विमोहा । दामिनी । । बिभुकना - क्रि० प्र० १. भड़कना । २. डरना । बिभुकाना - क्रि० स० भड़काना । बिट - संधा पुं० १. साहित्य में नायक का वह सखा जो सब कलाओं में निपुण हो । २. वैश्य । ३. नीच । खल । बिटारना - क्रि० स० १. घँघेालना । २. गंदा करना । बिटिया ! - संज्ञा स्त्री० दे० "बेटी" । बिटूल - संज्ञा पुं० १. विष्णु का एक नाम । २. बंबई प्रांत में शोला- पुर के अंतर्गत पंढरपुर की एक देवमूर्ति ।
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