बिरही बिरही संज्ञा पुं० वह पुरुष जो अपनी - प्रेमिका के विरह से दुखित हो । विरही । । । बिराजना- क्रि० प्र० १. शोभित होना । २. बैठना । बिरादर-संज्ञा पुं० भाई । भ्राता । बिरादरी - संज्ञा स्त्री० भाईचारा । बिरान, बिराना - वि० दे० "बे- गाना" । ५५२ बिलोना दीवारों पर मिट्टी की बॉबी बनाती है । भ्रमरी । संज्ञा स्त्री० आँख की पलक पर होने- वाली एक छोटी फुसी । बिलपना- क्रि० प्र० रोना । बिल फेल - क्रि० वि० इस समय । बिलबिलाना - क्रि० भ० १. छोटे छोटे कीड़ों का इधर-उधर रेंगना व्याकुल होकर इधर-उधर चिल्लाना । बिलमना-कि० भ० स० १. विलंब बिराना, बिरावना - क्रि० किसी को चिढ़ाने के हेतु मुँह की कोई विलक्षण मुद्रा बनाना । बिरियाँ - संज्ञा स्त्री० समय । संज्ञा स्त्री० बार । दफ़ा । बिरुझना | - क्रि० अ० झगड़ना । बिलंद - वि० ऊँचा । बड़ा । विलंबना* +- क्रि० अ० विलंब करना । बिल - संज्ञा पुं० छेद । दरज । विवर । बिलकुल - क्रि० वि० पूरा पूरा । सब । बिलखना- कि० भ० विलाप करना । रोना । बिलखाना-कि० स० बिलखना का सकर्मक रूप | क्रि० प्र० दे० "बिलखना" । बिलग - वि० अलग । पृथक । जुदा । संज्ञा पुं० १. पार्थक्य । 1 अलग होने का भाव । २. द्वेष या और कोई रंज । बुरा भाव । बिलगाना - क्रि० प्र० अलग होना । पृथक होना । दूर होना । क्रि० स० १. श्रलग करना । २. पृथक करना । २. करना । २. ठहर जाना । रुकना । बिलमाना- क्रि० स० प्रेम के कारण रोक या ठहरा रखना । बिललाना-क्रि० प्र० दे० "बिलखना" | बिलवाना+-क्रि० स० खो देना । बरबाद करना । बिलसना- क्रि० प्र० शोभा देना । भला जान पड़ना । क्रि० स० भोग करना । बिलसाना० /- क्रि० स० भोग करना । बरतना । बिला - अव्य० बिना । भोगना । बगैर | बिलाई - संज्ञा खो० बिल्ली । बिलारी। बिलाना- क्रि० प्र० नष्ट होना । बिलारी - संज्ञा स्त्री० दे० "बिल्ली" । बिलावल - संज्ञा पुं० एक राग । बिलैया ] -संज्ञा श्री० १. बिल्ली । बिलासना - क्रि० स० भोगना । कद्दूकश । २. बिलोकना - क्रि० स० देखना । बिलोकनि -संज्ञा स्त्री० १. देखने की क्रिया । २. दृष्टिपात । कटाच । बिलटी-संशा स्त्री० रेल के द्वारा भेजे बिलोड़ना - क्रि० स० १. दूध आदि जानेवाले माल की रसीद । बिलनी -संज्ञा बी० काली भौंरी जो मथना । २. अस्त-व्यस्त करना । बिलोना - क्रि० स० दूध आदि मधना ।
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