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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/५६१

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बिलोलना किसी वस्तु विशेषतः पानी की सी को खब हिलाना । बिलोलना- क्रि० स० हिलाना । वस्तु बिल्ला -संज्ञा पुं० मार्जार | बिल्ली का नर । संज्ञा पुं० चपरास की तरह की पीतल की पतली पट्टी । बिल्ली -संज्ञा स्त्री० १. एक प्रसिद्ध मांसाहारी पशु जो सिंह, व्याघ्र, चीते श्रादि की जाति का, पर इन सबसे छोटा होता है । २. एक प्रकार की किवाड़ की सिटकिनी । बिलैया । बिल्लोर - संज्ञा पुं० एक प्रकार का स्वच्छ सफ़ ेद पारदर्शक पत्थर । स्फटिक | बिल्लौरी - वि० बिल्लौर का । विवरना - कि० अ० दे० "ब्योरना" । विवराना- क्रि० स० बालों को खुलवाकर सुलवाना | बिसंच - संज्ञा पुं० संचय का अभाव | वस्तुनों की सँभाल न बेपरवाई | रखना । बिसंभर-संज्ञा पुं० दे० "विश्वं- भर" । बिस-संज्ञा पुं० दे० "विष" । बिसखपरा-संज्ञा पुं० १. गोह की जाति का एक विषैला सरीसृप २. एक प्रकार की जंगली जंतु । बूटी | बिसद - वि० दे० " विशद" । बिसन-संज्ञा पुं० दे० " व्यसन" । बिसनी - वि० १. जिसे किसी बात व्यसन या शौक़ हो । का छैला | २. ५५३ बिसूरना बिसमड + - संज्ञा पुं० दे० "विस्मय" । बिसमिल - बि० घायल | बिसयक - संज्ञा पुं० देश । प्रदेश | बिसरना- क्रि० स० भूलना । बिसराना- क्रि० स० भुलाना । ध्यान मे न रखना । बिसराम - संज्ञा पुं० दे० "विश्राम" । बिसवासी - वि० १. जो विश्वास करे | २. जिस पर विश्वास हो । वि० जिस पर विश्वास न किया जा सकं । बेएतबार । बिसहना - क्रि० स० मोल लेना । ख़रीदना । बिसहर -संज्ञा पुं० सर्प । बिसाख -संज्ञा स्त्री० दे० "विशाखा" । बिसात - संज्ञा स्त्री० १. हैसियत । श्रीकात । २. शतरंज या चौपड़ श्रादि खेलने का कपड़ा जिस पर खाने बने होते हैं । बिसाती-संज्ञा पुं० सूई, तागा, चूड़ी, खिलौने इत्यादि वस्तुओंों का बेचने- वाला । 1 बिसारद-संज्ञा पुं० दे० "विशारद" । बिसारना- क्रि० स० भुलाना । स्मरण न रखना | ध्यान में न रखना । बिसारा - वि० विष भरा । विषाक । विषैला | बिसासिन - संज्ञा श्री० (स्त्री०) जिस पर विश्वास न किया जा सके । बिसाहना- क्रि० स० ख़रीदना । मोळ लेना । संज्ञा पुं० १. काम की चीज़ जिसे खरीदें । सौदा | २. मोल लेने की क्रिया । खरीद | बिसिख - संज्ञा पुं० दे० "विशिख" । बिसूरना- क्रि० भ० खेद करना ।