बीजबंद बीजबंद - संज्ञा पुं० खिरेंटी या बरियारे के बीज । बीजमंत्र - संज्ञा पुं० १. किसी देवता के उद्देश्य से निश्चित मूल-मंत्र । २. गुर । बीजा - वि० दूसरा । बीजाक्षर -संज्ञा पुं० किसी बीज मंत्र का पहला अक्षर । बीजी-संज्ञा स्त्री० गिरी । मींगी । वीजु, बीजुरी-संज्ञा स्त्री० दे० "वि. जला" । बीज - वि० जो बीज बोने से उत्पन्न हो। कलभी का उलटा । संज्ञा पुं० दे० "बिज्जु" । बीट- संज्ञा स्त्री० पक्षियों की विष्ठा । बीड़ा संज्ञा पुं० पान लोरी । खीली । बीडी-संज्ञा श्री० १. की सादी गि- ३. दे० " बीड़ा" । २. गड्डी । दे० "बीड़" । । मिस्सी जिले स्त्रियाँ दाँत रँगने के लिये मुँह में मलती हैं । ४. पत्ते में लपेटा हुधा सुरती का चूर जिसे लोग सिगरेट या चुरुट आदि की तरह सुलगाकर पीते हैं । बीतना-क्रि० भ० समय का विगत होना । वक्त कटना । बीधना- क्रि० प्र० फँसना । क्रि० स० दे० "बींधना" । बीन-संज्ञा स्त्री० सितार की तरह का पर उससे बड़ा एक प्रसिद्ध बाजा । वीणा । बीनना - क्रि० स० १. छोटी छोटी चीज़ों को उठाना । चुनना । २. छटिकर वग करना । छुटिना । क्रि० स० दे० "बींधना" । क्रि० स० दे० "बुनना" । ५५५ बीसी बीफै- संज्ञा पुं० बृहस्पतिवार | बीबी - संज्ञा श्री० १. कुक्षबधू । कुलीन स्त्री । २. पत्नी । स्त्रो । बीभत्स - वि० जिसे देखकर घृणा उत्पन्न हो । घृणित । संज्ञा पुं० काव्य के नौ रसों के अंत- र्गत सातवीं रस। इसमें रक्त-मांस श्रादि ऐसी बातों का वर्णन होता है जिनसे अरुचि और घृणा उत्पन्न होती है । बीमा - संज्ञा पुं० किसी प्रकार की विशे- पतः श्रार्थिक हानि पूरी करने की ज़िम्मेदारी जो कुछ निश्चित धन लेकर उसके बदले में की जाती है । बीमार - वि० वह जिसे कोई बीमारी हुई हो । रोगग्रस्त । रोगी । बीमारी - सज्ञा श्री० रोग { व्याधि । बीर - वि० दे० "वीर" । बीरज - संग पुं० दे० "वीर्य्य" । बीरन - संज्ञा पुं० भाई । बीरबहूटी - सशा स्त्री० - सशा स्त्री० गहरे लाल रंग का एक छोटा रेंगनेवाला बरसाती कीड़ा । इंद्रवधू | बीरा - सज्ञा पुं० १. पान का बीड़ा । २. वह फूल, फल आदि जो देवता के प्रसाद स्वरूप भक्तों श्रादि को मिलता है । . बीरी + - संज्ञा स्त्री० १ पान का बीड़ा । २. वान में पहनने का एक गहना । तरना । बीस - वि० जो संख्या में उम्मीस से एक अधिक हो । सज्ञा स्त्री० बीस की संख्या या अंक-- २० । बीसी - संज्ञा स्त्री० बीस चीज़ों का समूह । कोड़ी ।
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