बेड़ा - वि० आड़ा | तिरछा । चैत -संज्ञा पुं० एक प्रसिद्ध लता जिसके डंठल से छड़ियाँ और टोकरियाँ आदि बनती हैं । बेदा - संज्ञा पुं० १. माथे पर लगाने का गोल तिलक । टीका । २. एक आभूषण । बेदी - संज्ञा स्त्री० १. टिकली । २. शून्य । सुवा । ३. दावनी या बंदी नाम का गहना । - ५५६ बेअंत↑ क्रि० वि० जिसका कोई अंत न हो । अनंत । बेहद | बेअकल - वि० मूर्ख | बेअदब- वि० जो बड़ों का आदर- सम्मान न करे । बेश्राब - वि० जिसमें आब ( चमक ) न हो । बेआबरू - वि० बेइज्जत | बेइज्ज़त - वि० १. जिसकी कोई प्रतिष्ठा न हो । अप्रतिष्ठित । २. अपमानित | बेईमान - वि० १. जिसे धर्म का विश्वार न हो । श्रधर्मी । २. जो अन्याय, कपट या और किसी प्रकार का अनाचार करता हो । बेउज्र - वि० जो आज्ञा-पालन करने में कोई आपत्ति न करे । बेकदर - वि० बेइज्ज़त । श्रप्रतिष्ठित । बेकरार - वि० जिसे शांति या चैन न हो । व्याकुल । बेकल | - वि० व्याकुल । वेकली - संज्ञा स्त्री० घबराहट । बेचैनी । बेकसूर - वि० जिसका कोई दोष या कसूर न हो । निरपराध । बेकाम - वि० १. जिसे कोई काम न बेजड़ काम में न आ सके । बेकायदा - वि० कायदे के खिलाफ | नियमविरुद्ध । बेकार - वि० १. निकम्मा । निठल्ला | २ निरर्थक | बे, कुसूर - वि० जिसका कोई कुसूर न हो । बेखटके - कि० वि० बिना किसी प्रकार की रुकावट या असमंजस के निस्सं. कोच । । बेखबर - वि० बेहोश | बेसुध । बेग - संज्ञा पुं० दे० "वेग" । बेगम -संज्ञा स्त्री० शनी । राजपक्षी । बेगरज - वि० जिसे कोई ग़रज़ या परवा न हो । बेगाना - वि० १. ग़ैर । दूसरा । २. नावाकिफ़ । अनजान । बेगार - सज्ञा स्त्री० १. बिना मज़दूरी का ज़बरदस्ती लिया हुआ काम । २. वह काम जो चित्त लगाकर न किया जाय । बेगारी-संज्ञा स्त्री० बेगार में काम करनेवाला आदमी । - बेगि क्रि० वि० १. जल्दी से । शीघ्रतापूर्वक । २. चटपट । तुरंत । बेगुनाह - वि० जिसने कोई गुनाह या अपराध न किया हो । बेकसूर | निर्दोष | बेचना - क्रि० स० मूल्य लेकर कोई पदार्थ देना । विक्रय करना । बेचारा - वि० दीन और निस्सहाय । ग़रीब | बेचैन - वि० जिसे चैन न पड़ता हो । व्याकुल । हो । निकम्मा | २. जो किसी बेजड़ - वि० जिसकी कोई जड़ या
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