बेदम दखल या कुब्जे का हटाया जाना अथवा न होना । बेदम - वि० १. मृतक । मुरदा । २. मृतप्राय । ३. जर्जर । बेदमुश्क- संज्ञा पुं० एक वृक्ष जिसमें कोमल और सुगंधित फूल लगते हैं । बेदर्द - वि० जो किसी की व्यथा को न समझे । कठोरहृदय | बेदाग - वि० १. जिसमें कोई दाग या धब्बा न हो । साफ़ । २. निर्दोष । बेदाना - संज्ञा पुं० १. एक प्रकार का बढ़िया काबुली अनार । २. बिही दाना नामक फल का बीज । दारु- हल्दी | चित्रा । बेधडक - क्रि० वि० १. प्रकार के संकोच के । २. बे-ख़ौफ़ । ३. बिना आगा- पीछा किए । बिना किसी निःसंकोच | बि० १ निद्वै । २. निर्भय । बेधना- क्रि० स० नुकीली चीज़ की सहायता से छेद करना । बेधर्म - वि० जिसे अपने धर्म का ध्यान न हो । बेधीर - वि० अधीर । ५६१ बेल वाही ] १. बेफ़िक्र । २. मनमौजी । बेपाइ - वि० जिसे कोई उपाय न सूके । भैौचक । बेपीर - वि० दूसरों के कष्ट को कुछ न समझनवाला । । बेपैदी - वि० जिसमें पैदा न हो । बेफिक वि० निश्चिंत । बेपरवा । बेबस - वि० [ संभा बेबसी ] जिसका कुछ वश न चले । लाचार | बेबाक - वि० चुकता किया हुआ । चुकाया हुआ । ( ऋण ) बेभाव - क्रि० वि० जिसकी कोई गिनती न हो । बेहद । बेमालूम - क्रि० वि० बिना किसी को पता लगे । 1 वि० जो मालूम न पड़ता हो । बेर-संज्ञा पुं० १. एक प्रसिद्ध कँटीला वृक्ष जिसके कई भेद होते हैं । २. इस वृक्ष का फल | संज्ञा स्त्री० १. बार । दफ़ा । २. विलंब | बरहम - वि० [संज्ञा बेरहमी ] निर्दय । निठुर | बेरT+ - संज्ञा पुं० समय । वक्त । बेन + - संज्ञा पुं० १. वंशी । मुरली । बेरियाँ | -संज्ञा स्त्री० समय । वक्त | २. महुवर । । बेनसीव - वि० श्रभागा । बदकिस्मत | बेना + - संज्ञा पुं० बाँस का बना हुआ छोटा पंखा । बेनी - संज्ञा स्त्री० १. स्त्रियों की चोटी । २. गंगा, सरस्वती और यमुना का संगम । धेनु - संज्ञा पुं० दे० "बेणु” । बेपरद- वि० नंगा । नप्न । बेपरवा, बेपरवाह - वि० [ संज्ञा बेपर- ३६ बेरी - सज्ञा श्री० १. दे० "बेर" । २. दे० "बेड़ी" । वेरुख -- वि० [ संज्ञा बेरुखी ] जो समय पड़ने पर रुख ( मुँह ) फेर ले। बेल -संज्ञा पुं० मझोले आकार का एक प्रसिद्ध कँटीला वृक्ष । इसमें गोल फल लगते हैं । श्रीफल । संज्ञा स्त्री० १. वल्ली। बता । ततर । २. कपड़े या दीवार आदि पर बनी
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