ब्यापार ब्योपार - संज्ञा पुं० दे० " व्यापार " । व्योरन -संज्ञा स्त्री० बालों के सँवारने की क्रिया या ढंग | ५६६ ब्योरना- क्रि० स० गुधे या उलझे हुए बालों आदि को सुलझाना । ब्योरा - संज्ञा पुं० १. विवरण । तफ़ - सील । २. समाचार | ब्योहर - संज्ञा पुं० लेन-देन का व्यापार । रुपया ऋण देना । ब्योहरिया - संश पुं० सूद पर रुपए के लेन-देन का व्यापार करनेवाला | ब्योहार - संज्ञा पुं० दे० " व्यवहार" | ब्रज- संज्ञा पुं० दे० " व्रज" । ब्रह्म ड - संज्ञा पुं० दे० "ब्रह्मांड" । ब्रह्म- संज्ञा पुं० १. एक मात्र नित्य चेतन सत्ता जो जगत का कारण और सत्, चित् श्रानंद स्वरूप है । २. ब्राह्मण जो मरकर प्रेत हुश्रा हो । , ब्रह्मराक्षस । | ब्रह्मचर्य - संज्ञा पुं० १. वीर्य को रक्षित रखने का प्रतिबंध । २ चार श्राश्रमों में पहला श्राश्रम | ब्रह्मखारिणी - संज्ञा स्त्री० ब्रह्मचर्य का व्रत धारण करनेवाली स्त्री । ब्रह्मचारी - संज्ञा पुं० [स्त्री० ब्रह्मचारिणी ] ब्रह्मचर्य का व्रत धारण करनेवाला । ब्रह्मज्ञान - संज्ञा पुं० ब्रह्म, पारमार्थिक सत्ता या अद्वैत सिद्धांत का बोध | ब्रह्मज्ञानी - वि० परमार्थ तत्त्व का बोध रखनेवाला । ब्रह्मद्रोही - वि० ब्राह्मणों से बैर रखने- वाला । ब्रह्मद्वार - संज्ञा पुं० ब्रह्मरंध्र । ब्रह्मपुत्र - संज्ञा पुं० एक नद जो मान- सरेश्वर से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरता है । ब्राह्मण ब्रह्मभोज - संज्ञा पुं० ब्राह्मण भोजन । ब्रह्ममुहूत - संज्ञा पुं० प्रभात । तड़का । ब्रह्मरंध्र-संज्ञा पुं० मस्तक के मध्य में माना हुआ गुप्त छेद जिससे होकर प्राण निकलने से ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है । ब्रह्मराक्षस - संज्ञा पुं० वह ब्राह्मण जो मरकर भूत हुआ हो । ब्रह्मलेख संज्ञा पुं० भाग्य का लेख जो ब्रह्मा किसी जीव के गर्भ में आते ही उसके मस्तक पर लिख देते हैं। ब्रह्मर्षि - संज्ञा पुं० ब्राह्मण ऋषि । ब्रह्मवाद - संज्ञा पुं० १. वेद का पढ़ना- पढ़ाना । २. श्रद्वैतवाद | ! ब्रह्मविद्या - संज्ञा स्त्री० ब्रह्म को जानने की विद्या । उपनिषद् विद्या । ब्रह्मसमाज - संज्ञा पुं० दे० " ब्राह्म- समाज" । ब्रह्महत्या - संज्ञा स्त्री० ब्राह्मण वध | ब्राह्मण को मार डालना ( महा- पाप ) । ब्रह्मांड - संज्ञा पुं० १. चौदहों भुवनों का समूह । २. खोपड़ी । कपाल । ब्रह्मा - संज्ञा पुं० ब्रह्म के तीन सगुण रूपों में से सृष्टि की रचना करने- वाला रूप । विधाता । ब्रह्माणी - संज्ञा स्त्री० ब्रह्मा की स्त्री या शक्ति | - 1 ब्रह्मानंद - संज्ञा पुं० ब्रह्म के स्वरूप के अनुभव से होनेवाला श्रानंद ब्रह्मावन्त संज्ञा पुं० सरस्वती और दृश- द्वती नदियों के बीच का प्रदेश ब्रह्मास्त्र - संज्ञा पुं० एक प्रकार का अन जो मंत्र से चलाया जाता था । ब्राह्मण-संज्ञा पुं० [स्त्री० ब्राह्मणी ]
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