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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/५७५

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ब्राह्ममुहूर्त १. चार वर्णों में सबसे श्रेष्ठ वर्ण या जाति जिसके प्रधान कर्म पठन-पाठन, यज्ञ, ज्ञानोपदेश आदि हैं । २. वेद का वह भाग जो मंत्र नहीं कहलाता । ब्राह्ममुहूर्त - संज्ञा पुं० सूर्योदय से पहले दो घड़ी तक का समय । ब्राह्मसमाज - संज्ञा पुं० एक नया संभ- ५६७ भँडसाल दाय जिसमें एक मात्र ब्रह्म की ही उपासना की जाती है । ब्राह्मी - संज्ञा स्त्री० १. दुर्गा | २. भारतवर्ष की वह प्राचीन लिपि जिससे नागरी, बँगला श्रादि श्राधु- निक लिपियाँ निकली हैं । ३. एक प्रसिद्ध बूटी जो स्मरण शक्ति और बुद्धि बढ़ानेवाली है । भ - हिंदी वर्णमाला का चौबीसवाँ और पवर्ग का चौथा वर्ण । लहर । भंग - संज्ञा पुं० १. तरंग | २. पराजय । ३. टुकड़ा । संज्ञा श्री० दे० "भाँग" । भंगड़ - वि० बहुत भाँग पीनेवाला । भँगेड़ी । भंगी-संज्ञा पुं० [स्त्री० भगिन ] एक अस्पृश्य जाति जिसका काम मलमूत्र आदि उठाना है । भंगुर - वि० १. भंग होनेवाला । २. नाशवान् । भँगेड़ी - वि० दे० "भंगड़”। भंजन-संज्ञा पुं० १. तोड़ना । २. भंग करना । भँजना- क्रि० ५० १. टुकड़े-टुकड़े होना । २. किसी बड़े सिक्के का छोटे-छोटे सिक्कों से बदला जाना । क्रि० प्र० 1. बटा जाना । २. भौजा जाना । भजाना - क्रि० स० तोड़ना । भँजाना + - क्रि० स० १. बड़ा सिक्का भ आदि देकर उतने ही मूल्य के छोटे सिक्के लेना । २. भुनाना । क्रि० स० दूसरे को भाजने के लिये प्रेरणा करना या नियुक्त करना । भंटा - संज्ञा पुं० बैंगन । भंड- संज्ञा पुं० दे० "माँड़" । वि० १. अश्लील या गंदी बातें बकनेवाला । २. पाखंडी । भँड़फोड़ - संज्ञा पुं० १. मिट्टी के बर्तनों को गिराना या तोड़ना- फोड़ना । २. रहस्योद्घाटन | ३. भंडाफोड़ | भंडरिया - संज्ञा पुं० एक जाति का नाम । इस जाति के लोग सामु- द्रिक आदि की सहायता से लोगों को भविष्य बताकर निर्वाह करते हैं। भडूर । वि० पाखंडी । संज्ञा खो० दीवारों में बना हुआ पल्लेदार ताख । भँडसार, भँड़साल | -संज्ञा स्त्री० वह गोदाम जहाँ श्रन्न इकट्ठा