भट्ट के लिये एक आदरसूचक शब्द । भट्ट - संज्ञा पुं० १. ब्राह्मणों की एक उपाधि । २. भाट । २. भट्ठा - संज्ञा पुं० १. बड़ी भट्ठी । ईंटें या खपड़े इत्यादि पकाने का पजावा । भट्टी - संज्ञा स्त्री० १. ईंटों आदि का बना हुआ बड़ा चूल्हा जिस पर हलवाई, लोहार और वैद्य आदि अनेक प्रकार के काम करते हैं। २. वह स्थान जहाँ देशी शराब बनती है । भठियारपन-संज्ञा पुं० १. भठियारे का काम । २. भठियारों की तरह लड़ना और गालियाँ बकना । भठियारा - संज्ञा पुं० [ खो० भठियारी या भठियारिन ] सराय का प्रबंध करने- वाला या रक्षक । भड़क - संज्ञा स्त्री० १. दिखाऊ चमक- दमक । चमकीलापन | भड़कीले होने का भाव | २. उत्तेजित होने का भाव । भड़कदार - वि० १. चमकीला । भड़- कीला | २. रोबदार | भड़कना - क्रि० प्र० १ तेज़ी से जल उठना । २. झिझकना । चौंकना । डरकर पीछे हटना । ( पशुओं के लिये ) ३. क्रुद्ध होना । भड़काना - क्रि० स० १. प्रज्वलित करना । जलाना । २. उभारना । भड़कीला - वि० दे० " भड़कदार" । भड़भड़ - संज्ञा स्त्री० १. भड़भड़ शब्द जो प्रायः आघातों से होता है । ५७० भद्र २. भीड़ । भभड़ । ३. व्यर्थ की और बहुत अधिक बातचीत । भड़भड़िया - वि० बहुत अधिक और व्यर्थ की बातें करनेवाला । भड़भूजा - संज्ञा पुं० एक जाति जो भाड में अन भूनती है । भोड़हाई* +- क्रि० वि० चोरों की तरह । लुक छिप या दबकर । भडी - संज्ञा स्त्री० झूठा बढ़ावा । भड श्रा- संज्ञा पुं० वह जो वेश्याश्रों की दलाली करता हो । भणना- क्रि० अ० कहना । भणित - वि० कहा हुआ । भतार+ - संज्ञा पुं० पति । भतीजा संज्ञा पुं० [ खो० भतीजी ] भाई का पुत्र | भाई का लड़का । भत्ता - संज्ञा पुं० दैनिक व्यय जो किसी कर्मचारी को यात्रा के समय मिल- ता है - 1 खसम । भदई-संज्ञा श्री० वह फसल जो भादों में तैयार होती है । भदाघर - संज्ञा पुं० एक प्रांत जो अाजकल ग्वालियर राज्य में है । भदेसिल + - वि० भद्दा | भोंडा । भदौंह - वि० भादों मास में होने- वाला । भदौरिया - वि० भदावर प्रांत का । भदावर - संबंधी | भद्दा - वि०, पुं० [स्त्री० भद्दी ] जो देखने में मनोहर न हो । कुरूप । भद्दापन-मंज्ञा हुँ० भद्दे होने का भाव । भद्र - वि० सभ्य । सुशिक्षित ।
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