भरतार कीन सालन जो बैंगन, आलू आदि को खसम । भूनकर बनाया जाता है । चोखा भरतार - संज्ञा पुं० पति । भरती - संज्ञा बी० १. किसी चीज़ में I भर जाने का भाव । भरा जाना । २. दाखिल या प्रविष्ट होने का भाव । भरथरी - संज्ञा पुं० दे० " भतृहरि" । भरद्वाज - संज्ञा पुं० १. एक वैदिक ऋषि जो गोत्र-प्रवत्तक और मंत्र- कार थे । २. इन ऋषि के वंशज । भरना - कि० स० खाली जगह को पूरा करने के लिये कोई चीज़ डालना । संज्ञा पु० भरने की क्रिया या भाव । भरनी-सशा बी० करघे में की ठरकी । नार । - भरपाई क्रि० वि० पूर्ण रूप से । भली भाँति । संज्ञा खी० जो कुछ बाक़ी हो, वह पूरा पूरा पा जाना । भरपूर - वि० १. पूरी तरह से भरा हुश्रा । २ परिपूर्ण । क्रि० वि० पूर्ण रूप स । अच्छी तरह । भरम - संज्ञा पुं० १ संशय । संदेह | २ रहस्य | भरमाना- क्रि० स० भ्रम में डालना । बहकाना | भरमार - संज्ञा स्त्री० बहुत ज्यादती । अत्यत अधिकता । भरराना- क्रि० भ० १. भरर शब्द के साथ गरना । २. टूट पड़ना । भरवाना- क्रि० स० भरने का काम दूसर से कराना । भरसक - क्रि० वि० यथाशक्ति । जहाँ तक हो सके । ५७२ भवदीय भरसाई - संज्ञा पुं० दे० " भाइ " | भराई -संज्ञा श्री० भरने की क्रिया, भाव या मज़दूरी । भराव - संज्ञा पुं० भरने का काम या भाव । भरित - वि० भरा हुआ । भरी - संज्ञा स्त्री० दस माशे या एक रुपए के बराबर एक तौल 1 भरुहाना + - क्रि० अ० घमंड करना । श्रभिमान करना । भरैया + वि० रक्षक । पालन करनेवाला । भरोसा - संज्ञा पुं० १. श्रासरा । सहारा । भर्ग-संज्ञा पुं० शिव । महादेव । भर्त्ता - संज्ञा पुं० १. अधिपति । स्वामी । २. मालिक । खाविद | भर्त्तार संज्ञा पुं० पति । स्वामी । भन्त हरि-संज्ञा पुं० एक प्रसिद्ध वैया- करण और कवि जो उज्जयिनी के राजा विक्रमादित्य के छोटे भाई थे । भर्त्सना -संज्ञा स्त्री० १. निंदा | शिकायत | भलमनसत, भलमनसी -संज्ञा स्त्री० भले मानस होने का भाव । शराकृत । भला - वि० १. अच्छा उत्तम । २. बढ़िया । सज्ञा पुं० कल्याण । भलाई - संधी० २. फटकार । । १. भले होने का भाव । भबारन । २. उपकार । नेकी | भले - क्रि० वि० भली भांति । अच्छी तरह । पूर्ण रूप से । भव-संज्ञा पुं० १. उत्पत्ति । जन्म । २. शिव । ३. संसार । जगत् । भवदीय - सर्व० आपका | तुम्हारा ।
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