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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/५९२

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भोग ५८४ 1 भोग -संज्ञा पुं० १. सुख या दुःख आदि का अनुभव करना ! २. विलास । ३. प्रारब्ध । ४. नैवेद्य । भोगना - क्रि० प्र० सुख-दुःख या शुभाशुभ कर्मफलों का अनुभव करना । भोगबंधक- संज्ञा पुं० बंधक या रेहन रखने का वह प्रकार जिसमें ब्याज के बदले में रेहन रखी हुई भूमि या मकान आदि भोगने का अधिकार होता है । भोग-विलास - संज्ञा पुं० आमोद- प्रमोद | सुख-चैन | भोगी - संज्ञा पुं० भोगनेवाला । वि० १. सुखी । २. इंद्रियों का सुख चाहनेवाला । ३. विषयासक्त । भोग्य - वि० भोगने योग्य । काम में लाने योग्य । भाग्यमान- वि० जो भोगा जाने को हो, अभी भोगा न गया हो । भोज - संज्ञा पुं० बहुत से लोगों का एक साथ बैठकर खाना-पीना । जेवनार । 1 १. कान्यकुब्ज के २. दे० "भोज" संज्ञा पुं० १. कान्यकुब्ज के एक प्रसिद्ध राजा जो महाराज रामभद्र देव के पुत्र थे । २. मालवे के परमार वंशी एक प्रसिद्ध राजा जो संस्कृत के बहुत बड़े विद्वान् कवि थे । भोजदेव - संज्ञा पुं० महाराज भोज । ( २ ) । भोजन - संज्ञा पुं० १. खाना । २० खाने की सामग्री । भोजनालय - संज्ञा पुं० रसोईघर । भोजपत्र - संज्ञा पुं० एक प्रकार का भौं तुवा मँझोले आकार का वृक्ष । इसकी छाल प्राचीन काल में ग्रंथ और लेख श्रादि लिखने में बहुत काम नाती थी । भोजपुरी - संज्ञा स्त्री० भेजपुर की भाषा । संज्ञा पुं० भोजपुर का निवासी । भोजराज -संज्ञा पुं० दे० "भोज" ( २ ) । भोजविद्या - संज्ञा खी० इंद्रजाल । बाज़ीगरी । भोज्य-मंज्ञा पुं० खाद्य पदार्थ । वि० खाने योग्य। जो खाया जा सके । भोटिया - संज्ञा पुं० भोट या भूटान देश का निवासी । संज्ञा स्त्री० भूटान देश की भाषा । वि० भूटान देश-संबंधी । भूटान का । भोपा - संज्ञा पुं० एक प्रकार की तुरही । भोपू । भोर- संज्ञा पुं० तड़का | भोला - वि० सीधा-सादा । सरल | भोलानाथ - संज्ञा पुं० महादेव। शिव । भोलापन - संज्ञा पुं० १. सिधाई । २. सरलता । मूर्खता । भोला-भाला - वि० सरल चित्त का । भौं- संज्ञा स्त्री० दे० "भौंह" । भौकना - क्रि० भ० कुत्तों का बोलना । भू कना । सीधा-सादा | भौचाल - संज्ञा पुं० दे० "भूकंप" । भौतुवा - संज्ञा पुं० १. काले रंग का एक कीड़ा जो प्रायः वर्षा ऋतु में जलाशयों श्रादि में जल-तक्ष ऊपर चक्कर काटता हुआ चलता है । २. एक प्रकार का रोग जिसमें