भट २. भौंचक । / । पतित । भ्रष्ट - वि० १. गिरा हुआ । २. जो ख़राब हो गया हो । भ्रष्टा- संज्ञा खो० कुलटा | भ्रांत संज्ञा पुं० तलवार के ३२ हाथों में से एक । भ्रांति - संज्ञा स्त्री० १, भ्रम । धोखा । । २. संदेह । शक । ३. मोह । प्रमाद । भ्राजना- क्रि० प्र० १. शोभा पाना । २. शोभायमान होना । भ्राजमान - वि० शोभायमान । भ्रात-संज्ञा पुं० दे० "भ्राता" । भ्राता - संज्ञा पुं० सगा भाई । ५८६ मंगलामुखी भ्रातृत्व - संज्ञा पुं० भाई होने का भाव या धर्म। भाईपन । भ्रातृद्वितीया - संज्ञा स्त्री० कार्त्तिक शुक्ल द्वितीया । यमद्वितीया । भ्रामक - वि० भ्रम में डालनेवाला । बहकानेवाला । - भ्रामर - संज्ञा पुं० १. मधु । शहद । २. दोहे का दूसरा भेद । भ्र-संज्ञा स्त्री० भौं भौंह | । भ्रण - संज्ञा पुं० स्त्री का गर्भ । भ्रूणहत्या - संज्ञा श्री० गर्भ के बालक की हत्या । भ्रभंग - संज्ञा पुं० त्यौरी चढ़ाना । म - हिंदी वर्णमाला का पचीसर्वां व्यंजन और पवर्ग का अंतिम वर्ण । मंगता - संज्ञा पुं० भिखमंगा । भिक्षुक | मंगन-संज्ञा पुं० भिक्षुक । मँगनी - संज्ञा बी० १. वह पदार्थ जो किसी से इस शर्त पर मांगकर लिया जाय कि कुछ समय के उपरांत लौटा दिया जायगा । २. इस प्रकार मांगने की क्रिया या भाव । मंगळ - संज्ञा पुं० १. अभीष्ट की सिद्धि | मनोकामना का पूर्ण होना । २. कल्याण । कुशन । ३. सौर जगत् का एक प्रसिद्ध ग्रह जो पृथ्वी के उपरांत पहले-पहल पड़ता है । भौम । कुज । ४. मंगलवार । । मंगलकलश (घट) - संज्ञा पुं० जल से भरा हुआ वह घड़ा जो मंगल- अवसरों पर पूजा के लिये रखा जाता है । मंगलवार - संज्ञा पुं० वह वार जो सोमवार के उपरांत और बुधवार के पहले पड़ता है । भौमवार । मंगलसूत्र - संज्ञा पुं० वह तागा जो किसी देवता के प्रसाद रूप में कलाई में बांधा जाता है। मंगलस्नान - संज्ञा पुं० वह स्नान ज मंगल की कामना से किया जाता है मंगला - संज्ञा बी० पार्वती । मंगलाचरण - संज्ञा पुं० वह श्लोक या पद आदि जो किसी शुभ कार्य के प्रारंभ में मंगल की कामना से पढ़ा लिखा या कहा जाय । मंगलामुखी - संज्ञा स्त्री० वेश्या । रंडी । 1 1
पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/५९४
दिखावट