मगर मगर - संज्ञा पुं० घड़ियाल नामक प्रसिद्ध जलजंतु । संज्ञा पुं० अराकान प्रदेश जहाँ मग जाति बसती है । अभ्य० लेकिन । । परंतु । पर । मगरमच्छ - संज्ञा पुं० १. मगर या घड़ियाल नामक जल-जंतु । बड़ी मछली । मगरूर - वि० घमंडी । श्रभिमानी । २. मग़रूरी - संज्ञा स्त्री० घमंड । अभिमान । मगह + - संज्ञा पुं० मगध देश । मगहर | -संज्ञा पुं० मगध देश । मगही - वि० मगध-संबंधी । देश का । मगध मगु, मग्ग-संज्ञा पुं० रास्ता । मग्ज्ञ-संज्ञा पुं० १. मस्तिष्क । दिमाग़ । २. गिरी । मग्न - वि० १. डूबा हुआ । २. तन्मय । लीन । लिप्त । ३. प्रसन्न । हर्षित | खुश । मघवा - संज्ञा पुं० इंद्र | मघा -संज्ञा जी० सत्ताईस नक्षत्रों में से दसव नक्षत्र जिसमें पाँच तारे हैं। मचक-संज्ञा स्त्री० दबाव । मचकना - क्रि० स० किसी पदार्थ को इस प्रकार ज़ोर से दबाना कि मच मच शब्द निकले । मचना- क्रि० प्र० किसी ऐसे कार्य का आरंभ होना जिसमें शोर-गल हो । मचलना - क्रि० भ० किसी चीज़ के लिये जिद बंधिना । हठ करना । मचला - वि० १. जो बोलने के अवसर पर जान-बूझकर चुप रहे । २. मचलनेवाला । मचलाना - क्रि० प्र० कै मालूम होना । कै मालूम होना । ५६० जी मतलाना । मजनूँ क्रि० स० किसी को मचलने में प्रवृत्त करना । 1
- क्रि० प्र० दे० " मचलना" ।
मचान-संशा बी० १. बाँस का टहर बाँधकर बनाया हुश्रा स्थान जिस पर बैठकर शिकार खेळते या खेत की रखवाली करते हैं । २. मंच | कोई ऊँची बैठक | मचाना- क्रि० स० कोई ऐसा कार्य प्रारंभ करना जिसमें हुल्लड़ हो । मचिया । - संज्ञा स्त्री० छोटी चारपाई । मचिलई -संज्ञा बी० १. मचलने का भाव । २. मचलापन । मच्छ-संज्ञा पुं० बड़ी मछली । मच्छड़, मच्छर-संज्ञा पुं० एक प्रसिद्ध छोटा बरसाती पतिरंगा । इसकी मादा काटती और डंक से रस चूसती है । मच्छी-संज्ञा स्त्री० दे० "मङ्गली" । मच्छोदरी - संज्ञा स्त्री० व्यास जी की माता और शांतनु की भार्या सत्य- वती । मछरंगा-संज्ञा पुं० एक प्रकार का जलपक्षी । रामचिड़िया । मछली - संज्ञा खी० जल में रहनेवाला एक प्रसिद्ध जीव जिसकी छोटी बड़ी असंख्य जातियाँ होती हैं । मीन । मछुत्रा, मछुवा - संज्ञा पुं० मछली मारनेवाला | मल्लाह । । मज़दूर संज्ञा पुं० १. कुली । २. कल-कारखानों में छोटा-मोटा काम करनेवाला श्रादमी । मज़दूरी - संज्ञा खी० १. मज़दूर का काम । २. उसकी उजरत । मजनूँ - संज्ञा पुं० १. पागल । २. अरब