मतावलंबी मतावलंबी-संज्ञा पुं० किसी एक मत या संप्रदाय का अवलंबन करनेवाला । मति-संज्ञा स्त्री० बुद्धि । समझ । + क्रि० वि० दे० " मत" । अव्य० समान । सदृश । मतिमंत - वि० बुद्धिमान् । मतिमान- वि० बुद्धिमान् । मतीरा - संज्ञा पुं० तरबूज़ | कलिंदा । मतीस - संज्ञा पुं० एक प्रकार का बाजा । मतेई |- संज्ञा स्त्री० विमाता । मत्कुण-संज्ञा पुं० खटमल । मस्त वि० १. मस्त । २. पागल । मत्तता - सज्ञा स्त्री० मतवालापन । मत्था | - संज्ञा पुं० दे० " माथा" । मत्सर- नशा पुं० १. डाह । जलन । २. क्रोध । मत्सरता-संज्ञा स्त्री० डाह । हसद । मत्सरी - संज्ञा पुं० मत्सरपूर्ण व्यक्ति । मत्स्य - संज्ञा पुं० १. मछली । २. प्राचीन विराट देश का नाम । ३. विष्णु के दस अवतारों में से पहला अवतार । मत्स्य पुराण-संज्ञा पुं० श्रट्ठारह पुराणों में से एक महापुराण । मत्स्यद्रनाथ - संज्ञा पुत्र एक प्रसिद्ध साधु और हठ-योगी जो गोरखनाथ के गुरु थे । मथन -संज्ञा पुं० मथने का भाव या क्रिया । बिलोना | मथना- क्रि० स० तरल पदार्थ को लकड़ा आदि से हिलाना या चलाना । बिलोना | मथनियाँ - संज्ञा स्त्री० दे० "मथनी " मथनी - संज्ञा स्त्री० वह मटका जिसमें दही मथा जाता है । मथानी -संज्ञा स्त्री० काठ का एक ३८ ।
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मदन- महोत्सव प्रकार का दंड जिससे दही से मथकर मक्खन निकाला जाता है । मथुरा - संज्ञा बी० पुराणानुसार सात पुरियों में से एक पुरी जो व्रज में यमुना के किनारे पर है । मथुरिया - वि० मथुरा से संबंध रखने- वाला । मथुरा का । मधः - वि० दे० "मदांध" । मद - सज्ञा पुं० १. हर्ष । श्रानंद | २. वह गंधयुक्त द्रव जो मतवाले हाथियों की कनपटियों से बहता है । ३. वीर्य । ४. कस्तूरी । ५. मद्य । ६. गर्व । श्रहंकार । संज्ञा स्त्री० विभाग | सीगा । सरिश्ता | मदक-सज्ञा स्त्री० एक प्रकार का मादक पदार्थ जो अफीम के सत से बनता है । इसे चिलम पर रखकर पीते हैं । मदकची - वि० जो मदक पीता हो । मदक पीनेवाला । मदकल - वि० मत्त । मतवाला । मदद संज्ञा स्त्रो० १. सहायता । २. मज़दूर और राज श्रादि जो किसी काम के ऊपर लगाए जाते हैं । मददगार - वि० मदद करनेवाला | मदन- संज्ञा पुं० कामदेव | मदनकदन - सज्ञा पुं० शिव । मदनगोपाल - सज्ञा पुं० श्रीकृष्ण चंद्र का एक नाम । मदनबान - संज्ञा पुं० एक प्रकार का बेला । (फूल) मदनमस्त - संज्ञा पुं० चंपे की जाति का एक प्रकार का फूल । मदन- महोत्सव -संज्ञा पुं० प्राचीन काल का एक उत्सव जो चैत्र शुक्ल द्वादशी से चतुर्दशी पर्पत होता था ।