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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/६०२

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मदनमोहन मदनमोहन -संज्ञा पुं० कृष्णचंद्र | - मदनोत्सव - संज्ञा पुं० मदन - महोत्सव | मदमत्त - वि० मस्त । मदरसा - संज्ञा पुं० पाठशाला । मदांध - वि० मदमत्त | मदार - संज्ञा पुं० श्राक । मदारी - सज्ञा पुं० १. वह जो बंदर, भालू आदि नचाते और बाग के तमाशे दिखाते हैं । २. बाज़ीगर । मदालसा - संज्ञा खो० एक गंधर्व कन्या जिस पातालकेतु दानव पाताल ले गया था । ( पुराण ) - मदिया संज्ञा श्री० दे० " मादा" । मदिरा - संज्ञा स्त्री० शराब | मदीला - वि० नशीला । मदोन्मत्त - वि० मद में पागल । माद्धम | - वि० १. मध्यम । मंदा | २. मद्ध - श्रव्य० १. बीच में । २. विषय में। मद्य-संज्ञा पुं० मदिरा । मद्यप-वि० शराबी । मद्र-संज्ञा पुं० रावी और झेलम के बीच का प्राचीन देश । मधिम० - वि० दे० " मध्यम" । मधु- संज्ञा पुं० १. शहद । २. वसंत ऋतु । वि० १. मीठा । । २. स्वादिष्ट । मधुकर - संज्ञा पुं० भौंरा । मधुकरी-सशास्त्री० वह भिक्षा जिसमें केवल पका हुआ न लिया जाता हो । मधुकैटभ-संज्ञा पुं० दो दैत्य जिन्हें विष्णु ने मारा था । ( पुराण ) मधुचक्र- संज्ञा पुं० शहद की मक्खी का छत्ता । ५६४ मध्य देश मधुजा-संज्ञा श्री० पृथ्वी । मधुप-संज्ञा पुं० भौंरा । मधुपति-संज्ञा पुं० श्रीकृष्ण । मधुपर्क - सज्ञा पुं० दही, घी, जल, शहद और चीनी का समूह जो देवताओं को चढ़ाया जाता है । मधुपुरी - संज्ञा स्त्री० मथुरा नगरी । मधुप्रमेह - संज्ञा पुं० दे० "मधुमेह " । मधुमक्खी-संज्ञा स्त्री० एक प्रकार का प्रसिद्ध मक्खी जो फूलों का रस चूसकर शहद एकत्र करती है । मधुमक्षिका - संज्ञा स्त्री० दे० "मधु- मकवी" । मधुमालती - संज्ञा खो० मालती लता । मधुमेह - सज्ञा पुं० प्रमेह का बढ़ा हुना रूप जिसमें पेशाब बहुत अधिक और गाढ़ा श्राता है । मधुर - वि० मीठा । मधुरता - संज्ञा खी० मधुर होने का भाव । मधुराई -संज्ञा स्त्री० दे० "मधुरता " । मधुराज - संज्ञा पुं० भौंरा । मधुरान - संज्ञा पुं० मिठाई । मधुरिमा - सज्ञा स्त्री० २. सुंदरता । १. मिठास । मधुवन - सज्ञा पुं० मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक चन । मधुशर्करा - संज्ञा खो० शहद से बनाई हुई चीनी । मधुसखा - संज्ञा पुं० कामदेव । मधुसूदन - संज्ञा पुं० श्रीकृष्ण । मधूक-संज्ञा पुं० महुश्रा । मध्य-संज्ञा पुं० किसी पदार्थ के बीच का भाग । मध्यता - संज्ञा स्त्री० मध्य का भाव । मध्य देश-संज्ञा पुं० भारतवर्ष का