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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/६०६

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मरहठ्ठा मरहठा - संज्ञा पुं० [ खी० मरहठिन 1 महाराष्ट्र देश का रहनेवाला । मरहठी - वि० मरहठों का । संज्ञा श्री० मरहठों की बोली । मरहम-संज्ञा पुं० श्रोषधियों का वह गाढ़ा और चिकना लेप जो घाव या पीड़ित स्थानों पर लगाया जाता है। मरहूम - वि० मृत | मरातिब - संज्ञा पुं० १. दरजा । २. तल्ला । मराना- क्रि० स० मरवाना । मराल - संज्ञा पुं० [ श्री० मराली ] हंस | मरिच - संज्ञा पुं० मिर्च । मरियम - संज्ञा स्त्री० १. कुमारी । २. ईसा मसीह की माता का नाम । मरियल - वि० बहुत दुर्बल । मरी-संज्ञा स्त्री० महामारी | मरीचि -संज्ञा पुं० एक ऋषि जो भृगु के पुत्र और कश्यप के पिता थे । संज्ञा स्त्री० किरण । मरीची संज्ञा पुं० १. सूर्य । चंद्रमा । २. मरीज़ - वि० रोगी । मरीना-संज्ञा पुं० एक प्रकार का मुलायम ऊनी पतला कपड़ा । मरु- संज्ञा पुं० मरुस्थल । मरुत् संज्ञा पुं० १. वायु । २. प्राण । मरुतवान्-संज्ञा पुं० १. इंद्र | २. हनुमान् । मरुथल - संज्ञा पुं० दे० " मरुस्थल " । मरुभूमि -संज्ञा खी० रेगिस्तान | मरुरना - क्रि० अ० ऐंठना । मरुस्थल -संज्ञा पुं० दे० " मरुभूमि" । मरोड़ - संज्ञा पुं० १. मरोड़ने का भाव या क्रिया । २. घुमाव ! मरोड़ना- क्रि० स० १. ऐंठना । २. ५६८ मसलना । मर्मच २. पेट मरोड़ा - संज्ञा पुं० १. ऐंठन । २. की वह पीड़ा जिसमें कुछ ऐंठन सी जान पड़ती हो । मर्कट- संज्ञा पुं० बंदर | मर्कटी-संज्ञा स्त्री० बानरी । मर्कत :- संज्ञा पुं० दे० " मरकत" । मर्तबान-संज्ञा पुं० रोग़नी बर्तन | श्रमृतवान । मर्त्य -- संज्ञा पुं० १. मनुष्य । २. भूले कि । मर्त्यलोक - संज्ञा पुं० पृथ्वी । मर्द - संज्ञा पुं० १ मनुष्य । २. साहसी पुरुष । ३ भर्ता । मर्दनाक्ष-कि करना । २. रौंदना । मर्दुम-सा पुं० मनुष्य | मर्दुमशुमारी - संज्ञा स्त्री० १. किसी दश में रहनेवाले मनुष्यों की गणना | २. जनसंख्या । मदुमी - संज्ञा स्त्री० मरदानगी । मर्द्दन-संज्ञा पुं० [वि० मर्द्दित ] १. स० १. मालिश कुचलना । २. रगड़ना । वि० नाशक । मईल - संज्ञा पुं० मृदंग की तरह का एक बाजा । इसका प्रचार बंगाल में है । मर्द्दित - वि० जो मर्दन किया गया हो । मर्म-संज्ञा पुं० १. स्वरूप । २. प्रा- गियों के शरीर में वह स्थान जहाँ श्राघात पहुँचने से अधिक वेदना होती है । मर्मज्ञ - वि० तत्वज्ञ ।