मर्मभेदक मर्मभेदक- वि० दे० " मर्मभेदी" । मर्मभेदी - वि० हृदय पर श्राघात पहुँचानेवाला । मर्मर - संज्ञा पुं० दे० "मरमर" । मर्मवचन -संज्ञा पुं० वह बात जिससे सुननेवाले को श्रांतरिक कष्ट हो । मर्मवाक्य-संज्ञा पुं० रहस्य की बात । भेद की या गूढ़ बात । मर्मविद् - वि० मर्मज्ञ | मर्मी - वि० मर्मज्ञ | ५६६ मर्याद -संज्ञा बी० १. दे० "मर्यादा" । २. रीति । मर्यादा -संज्ञा स्त्री० १. सीमा । २. सदाचार । ३. मान । मलंग-संज्ञा पुं० एक प्रकार के मुसल- मान साधु । मल - संज्ञा पुं० १. मैल । २. विकार । मलका -संज्ञा स्त्री० महारानी । मलखम- संज्ञा पुं० लकड़ी का एक प्रकार का खंभा जिस पर फुर्ती से चढ़ और उतरकर कसरत करते हैं । मलखाना +-संज्ञा पुं० पश्चिमी संयुक्त प्रांत में बसनेवाले एक प्रकार के राजपूत जो थब मुसलमान से हैं I हिंदू बन गए मलद्वार - संज्ञा पुं० १. शरीर की वे इंद्रियां जिनसे मल निकलते हैं । २ गुदा मलना- क्रि० स० १. मसलना । २. मालिश करना | मलमल - संज्ञा श्री० एक प्रकार का प्रसिद्ध पतला कपड़ा । मलमलाना- क्रि० स० बार बार स्पर्श कराना । मलमास-संज्ञा पुं० वह अमांत मास मलिच्छ जिसमें संक्रांति न पड़ती हो । मलय - संज्ञा पुं० १. पश्चिमी घाट का वह भाग जो मैसूर राज्य के दक्षिण और ट्रावंकोर के पूर्व में है । २. सफ़ ेद चंदन । मलयगिरि - संज्ञा पुं० १. मलय नामक पर्वत जो दक्षिण में है । २. मलय- गिरि में उत्पन्न चंदन । मलयज - संज्ञा पुं० चंदन | मलयागिरि - मंशा पुं० दे० " मलय- गिरि" । मलयाचल - संज्ञा पुं० मलय पर्वत । मलयानिल- संज्ञा पुं० १. मलय पर्वत की ओर से आनेवाली वायु । २. सुगंधित वायु । मलवाना- क्रि० स० मलने का काम दूसरे से कराना । मलहम - संज्ञा पुं० दे० " मरहम " | मलाई -संज्ञा स्त्री० १. बहुत गरम किए हुए दूध का ऊपरी मार भाग । २. सार । संज्ञा त्रो० मलने की क्रिया, भाव या मज़दूरी । मलान- वि० दे० "ग्लान" । मलानि - संज्ञा बी० दे० "म्ला नि" । मलामत -संज्ञा स्त्री० लानत । मलार - संज्ञा पुं० एक राग जो वर्षा ऋतु में गाया जाता है । मलाळ - संज्ञा पुं० १. दुःख । उदासीनता । मलाह- संज्ञा पुं० दे० "मल्लाह" । मलिंद -संज्ञा पुं० भौंरा । -- २. मलिक-संज्ञा पुं० [स्त्री० मलिका ] राजा । मलिक्ष, मलिच्छ - संज्ञा पुं० दे० ""लेख" ।
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