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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/६०९

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मसयारा मसयारा+-संज्ञा पुं० १. मशाल । २. मशालची । मसरफ - संज्ञा पुं० उपयोग । मसल संज्ञा श्री० कहावत । मसलन- वि० उदाहरणार्थ । मसलना - क्रि० स० मलना । मसलहत-संज्ञा स्त्री० अप्रकट शुभ हेतु । मसला -संज्ञा पुं० कहावत । मसविदा -संज्ञा पुं० दे० " मसौदा " । मसहरी - सज्ञा स्त्री० पलंग के ऊपर और चारों ओर लटकाया जानेवाला वह जालीदार कपड़ा जिसका उप- योग मच्छड़ों आदि से बचने के लिये होता है । मसा-संज्ञा पु० शरीर पर काले रंग का उभरा हुआ मांस का छोटा दाना । संज्ञा पुं० मच्छड़ । मसान - संज्ञा पुं० मरघट । मसाला - मज्ञा पुं० वे चीज़ जिनकी २. सहायता से कोई चीज़ तैयार होती हो मसालेदार - वि० जिसमें किसी प्रकार का मसाला है। । मसि - संज्ञा खी० १. रोशनाई । काजल । ३. कालिख । मसिदानी - संज्ञा स्त्री० दावात । मसिपात्र - संज्ञा पुं० दावात । मसिमुख - वि० जिसके मुँह में स्याही लगी हो । दुष्कर्म करनेवाला | मसियारा - सज्ञा पुं० दे० "मशा- बची" । मसिबिंदु-संज्ञा पुं० काजल का बुंदा जो नज़र से बचने के लिये बच्चों को लगाया जाता है। मसी-संज्ञा बी० दे० "मसि" । ६०१ मस्तूक मसीह, मसीहा - संज्ञा पुं० [वि० मसीही ] ईसाइयों के धर्मगुरु हज़रत ईसा । मसूड़ा-संज्ञा पुं० मुँह के अंदर का वह मांस जिस पर दाँत जमे होते हैं। मसूर संज्ञा पुं० एक प्रकार का द्विदल और चिपटा अन्न | - मसूरा - संज्ञा स्त्री० १. मसूर की दाल। २. मसूर की बनी हुई बरी | मसूरिका - संज्ञा श्री० १. शीतला । २. छोटी माता । मसूसना- क्रि० प्र० किसी मनेावेग को रोकना । मसेवरा+-संज्ञा पुं० मांस की बनी हुई खाने की चीज़ | मसोसना - क्रि० प्र० दे० "मसूसना " | मसौदा -संज्ञा पुं० १. मसविदा । खर्रा । २. उपाय | मसौदेबाज़ - संज्ञा पुं० १. अच्छी युक्ति सोचनेवाला | २. धूर्त | मस्करा :- संज्ञा पुं० दे० " मसखरा " । मस्त - वि० १. जो नशे श्रादि के कारण मत्त हो । २. प्रसन्न । मस्तक -संज्ञा पुं० सिर । मस्तगी-संज्ञा खो० एक प्रकार का बढ़िया गोंद । मस्ताना - वि० १. मस्तों का सा । २. मस्त । २. क्रि० भ० मस्त होना । क्रि० स० मस्ती पर लाना । मस्तिष्क-संज्ञा पुं० १. मग़ज़ । दिमाग । मस्ती -संज्ञा स्त्री० मतवालापन । मस्तूल-संज्ञा पुं० बड़ी नावों चादि के बीच का वह बड़ा शहतीर जिसमें पाल बांधते हैं ।