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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/६३१

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मुस्क्यान मुस्क्यान - संज्ञा श्री० दे० "मुस- कराहट" | मुस्टंडा - वि० १. मोटा-साज़ा । २. । मुस्तकिल - वि० अटल । मस्तैद - वि० तत्पर । मुस्तैदी -संज्ञा स्त्री० फुरती । स्थिर । -संज्ञा बी० १ तत्परता । २. . मुहकमा -संज्ञा पुं० सरिश्ता । भाग । वि. मुहताज - वि० १. दरिद्र । कंगाल | २. श्राकांक्षी । मुहब्बत-संज्ञा स्त्री० १. प्रीति । प्रेम । २. दोस्ती । ३. इश्क । मुहम्मद-संज्ञा पुं० अरब के एक प्रसिद्ध धर्माचार्य जिन्होंने इस्लाम या मुसलमानी धर्म का प्रवर्त्तन किया था । महम्मदी - मा पुं० मुसलमान । मुँहर-सञ्ज्ञा स्त्री० दे० "मोहर" । मुँहरा - संज्ञा पुं० १. सामने का भाग । श्रागा । २. शतरंज की गोटी । मुहर्रम -संज्ञा पुं० अरबी वर्ष का पहला महीना जिसमें इमाम हुसेन शहीद हुए थे । मुहरमी - वि० १. मुहम-संबंधी । २. शोक-व्यंजक ३. मनहूस । मुहर्रिर - संज्ञा पुं० लेखक । मुंशी | मुहर्रिरी - संज्ञा खा० मुहर्रिर का काम् । स्त्री० महाफिज - वि० १. हिफ़ाज़त करने- वाला । २. अदालत का एक कर्म- कर्म- वारी । मुहाल - वि० १. असंभव । नामुमकिन । २. कठिन । मुहावरा -संज्ञा पुं० १. रोज़मर्रा । ६२३ मूक बोलचाल । २. अभ्यास | आदत | मुहासिव - संज्ञा पुं० १. गणितज्ञ । २ जांचने या हिसाब लेनेवाला । मुहिम -संज्ञा स्त्री० कठिन या बड़ा काम । . मुहु:- अव्य० बार बार । महूर्त्त - संज्ञा पुं० १. दिन-रात का तीसर्वां भाग । २ शुभ समय । मूँग - संज्ञा स्त्री०, पुं० एक अत्र जिसकी दाल बनती है । मूँगफली - संज्ञा स्त्री० १. एक प्रकार का तुप जिसकी खेती फलों के लिये की जाती है । २. चिनिया बादाम । मूँगा - संज्ञा पुं० समुद्र में रहनेवाले एक प्रकार के कृमियों की लाक्ष ठठरी जिसकी गिनती रनों में की जाती है । मूँछ - संज्ञा स्त्री० ऊपरी ओठ के ऊपर के बाल जो केवल पुरुषों के उगते हैं । मूँज - संज्ञा स्त्री० एक प्रकार का तृण जिसमें टहनियाँ नहीं होतीं और बहुत पतली लंबी पत्तियाँ चारों ओर रहती हैं । मुँड़+-संज्ञा पुं० सिर । । मूंड़न-संज्ञा पुं० चूड़ाकरण संस्कार | मुडन । मूंड़ना - क्रि० स० १. सिर के बाल २. धोखा देकर माल बनाना । उड़ाना । मुँड़ी- मूँड़ी - संज्ञा बी० सिर । मूँदना - क्रि० स० ऊपर से कोई वस्तु फैलाकर छिपाना । मूक- वि० १. गूँगा । अवाक् । २. ०१. । । विवश ।