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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/६३२

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मूकता मूकता -संज्ञा खो० गूंगापन । मूका | -संज्ञा पुं० १. छोटा गोल झरोखा | मोखा । २. दे० "मुक्का " । मूज़ी -संज्ञा पुं० १. कष्ट पहुँचाने - वाला । २. दुष्ट । खल | मूठ - संज्ञा खी० १. मुष्टि । २. किसी औज़ार या हथियार का वह भाग जो हाथ में रहता है । मूठी - संज्ञा स्त्री० दे० "मुट्ठी" । मूड़-संज्ञा पुं० दे० "मूँदु" । मूढ़ - वि० मूर्ख । जड़बुद्धि मूढगर्भ - संज्ञा पुं० गर्भ का बिगड़ना जिससे गर्भ स्त्राव श्रादि होता है । मूढ़ता-संज्ञा स्त्री० मूर्खता । मृत -संज्ञा पुं० दे० " मूत्र” । मृतना- क्रि० प्र० पेशाब करना । मूत्र - संज्ञा पुं० शरीर के विषैले पदार्थ को लेकर उपस्थ-मार्ग से निकलने - वाला जल । पेशाब | मूत्रकृच्छ्र - संज्ञा पुं० एक रोग जिसमें पेशाब बहुत कष्ट से या रुक-रुककर होता है । मूत्राघात-संज्ञा पुं० पेशाब बंद होने का रोग | मूत्राशय - संज्ञा पुं० नाभि के नीचे का वह स्थान जिसमें मूत्र संचित रहता है। मूर - संज्ञा पुं० १. मूल । २. मूलधन । जड़ | मृरख - वि० दे० " मूर्ख" । मूरत - संज्ञा स्त्री० दे० "मूर्ति" । मूरतिवंत - वि० मूर्त्तिमान्। सशरीर मूरि, मूरी-संज्ञा स्त्री० १. मूल । २. जड़ी । । ६२४ मूर्खाभिषेक मूरुख1 वि० दे० " मूर्ख" । मूख - वि० बेवकूफ । श्रज्ञ । मूर्खता - संज्ञा स्त्री० मूढ़ता । नासमझी। मूर्च्छन- संज्ञा पुं० बेहोश करना । मूच्छना - संज्ञा स्त्री० संगीत में एक ग्राम से दूसरे ग्राम तक जाने में सातों स्वरों का आरोह-अवरोह । मूर्च्छा-संज्ञा स्त्री० वह अवस्था जिस में प्राणी निश्चेष्ट पड़ा रहता है । मच्छित, मर्छित - वि० जिसे मूच्छ आई हो । श्रचेत । मर्त्त - वि० जिसका कुछ रूप या प्रा- कार हो । - १. शरीर । देह । मृाप्त संज्ञा स्त्री० २. प्रतिमा । मात्तकार - संज्ञा पुं० मूर्ति बनाने- वाला । मूर्त्तिपूजक - संज्ञा पुं० वह जो मूर्त्ति या प्रतिमा की पूजा करता हो । मूर्तिपूजा - संज्ञा स्त्री० मूर्ति में ईश्वर यो देवता की भावना करके उसकी पूजा करना । मतिमान् वि० [स्त्री० मूर्त्तिमती ] १. जो रूप धारण किए हो । २. सा. चत् । प्रत्यक्ष । मद्ध-संज्ञा पुं० सिर । मूर्द्धन्य- वि० मूर्द्धा से संबंध रखने- वाला । मूद्ध न्य वर्ण-संज्ञा पुं० वे वर्ण जिनका उच्चारण मूर्द्धा से होता है । यथा- ऋ, ऋ, ट, ठ, ड, ढ, ण, र और प । मर्द्धा-संज्ञा पुं० सिर । मूर्द्धाभिषेक - संज्ञा पुं० [ वि० मूर्द्धा-