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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/६४५

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योगाभ्यास योगाभ्यास - संज्ञा पुं० योग शास्त्र के अनुसार योग के आठ अंगों का अनुष्ठान । योगाभ्यासी संज्ञा पुं० योगी । योगासन -संज्ञा पुं० योग साधन के आसन, अर्थात् बैठने के ढंग । योगिनी -संज्ञा स्त्री० रण-पिशाचिनी । योगिराज, योगेंद्र - संज्ञा पुं० बहुत बड़ा योगी । योगी - संज्ञा पुं० श्रात्मज्ञानी । योगीश, योगीश्वर - संज्ञा पुं० बहुत बड़ा योगी । योगीश्वरी - संज्ञा श्री० दुर्गा | योगेश्वर - संज्ञा पुं० १. श्रीकृष्ण । २. शिव । योगेश्वरी - संज्ञा स्त्री० दुर्गा । योग्य - वि० ठीक (पात्र ) । काबिल । योग्यता - संथा स्त्री० १. चमता । ला- यको | २. सामर्थ्य । योजक - वि० मिलाने या जोड़नेवाला । योजन - संज्ञा पुं० दूरी की एक नाप जो किसी के मत से दो कोस की, किसी के मत से चार कोस की और ६३७ रंगभूमि किसी के मत से आठ कोस की होती है। योजना - संज्ञा स्त्री० [वि० योजनीय, योजित ] १. नियुक्त करने की क्रिया । २. भावी कार्यों की व्यवस्था । आयोजन | . योद्धा - संज्ञा पुं० सिपाही । योनि - संज्ञा स्त्री० १. श्राकर । खानि । २. स्त्रियों की जननेंद्रिय । ३. प्राणियों के विभाग, जातिय या वर्ग जिनकी संख्या ८४ लाख कही गई है। यैौ भव्य० दे० "ये" । यौगिक - संज्ञा पुं० १. मिला हुआ । २. दो शब्दों से मिलकर बना हुआ शब्द | यौतक, यौतुक - संज्ञा पुं० दाइजा । जहेज | दहेज | यौधेय - संज्ञा पुं० योद्धा । यौवन - संज्ञा पुं० १. अवस्था का वह मध्य भाग जो बाल्यावस्था के उप- संत और वृद्धावस्था के पहले होता २. जवानी । है । र र - हिंदी वर्णमाला का सत्ताइसव रंगत - संज्ञा स्त्री० १. रंग का भाव । व्यंजन | रंक - वि० धनहीन । ग़रीब । रंग-संज्ञा पुं० १. नृत्य-गीत आदि । नाचना-गाना । २. प्रकार से भिन किसी दृश्य पदार्थ का वह गुया जिस- का अनुभव केवल आँखों से ही होता है । वर्ण। जैसे—खाल, काळा । २. मज़ा । श्रानंद । ३. हालत | रँगना - क्रि० स० रंग में डुबाकर किसी चीज़ को रंगीन करना । रंगबिरंगा - वि० अनेक रंगों का । रंगभवन -संज्ञा पुं० दे० "रंगमहल" | रंगभूमि-संज्ञा स्त्री० १. वह स्थान अहाँ कोई जलसा हो । २. माव्य-