कज्जावती बाज । २. मान-मय्यादा | लज्जावती - वि० स्त्री० शर्मीली । लज्जावान् - वि० [ खो० लज्जावती ] दे० "लजाशील" । लज्जित - वि० शर्म में पड़ा हुआ । शर्माया हुआ । 1 छट संज्ञा खो० बालों का गुच्छा । केशपाश । लटक-संज्ञा खो० १. लटकने की क्रिया २. श्रंगां की मनेाहर या भाव । चेष्टा । लक्कन - संज्ञा पुं० नाक में पहनने का एक गहना । लटकना - कि० भ० ऊँचे स्थान से लगकर नीचे की ओर कुछ दूर तक फैला रहना । लटका - संज्ञा पुं० बातचीत का बना- वटी ढंग | लटकाना - क्रि० स० किसी को लट- कने में प्रवृत्त करना । लरकीला - वि० [स्त्री० लटकीली] लट- कता या झूमता हुआ । लटना- क्रि० प्र० १. थककर गिर जाना । २. दुबला और कमज़ोर होना । लटपटा - वि० [स्त्री० लटपटी] गिरता- पढ़ता । लड़खड़ाता हुआ । लटपटाना- क्रि० अ० १. गिरना- पड़ना । २. डिगना । ३. लुभाना । मोहित होना । ला + - वि० [स्त्री० लटी ] १. लोलुप । २. लंपट । लापट्टी-संा खो० खटपटाने की क्रिया या भाव। लटापोटी - वि० मोहित । कटी - संज्ञा खी० १. साधुनी । भक्तिन । ६६१ लड़गा २. वेश्या । रंडी । लट्टू-संज्ञा पुं० दे० "बह " । लहूरी-संज्ञा खो० सिर के बालों का लटकता हुआ गुच्छा । केश । लट्टू-संज्ञा पुं० एक गोल खिलौना जिसे सूत के द्वारा ज़मीन पर फेंक- कर नचाते हैं । लट्ठ - पंज्ञा पुं० बड़ी बाठी । लट्ठबाज़ - वि० लाठी लड़नेवाला । लठैत । लट्ठमार - वि० अप्रिय और कठोर कर्करा । कड़वा । लट्ठा-संज्ञा पुं० लकड़ी का बहुत लंबा टुकड़ा । बल्ला । शहतीर । लठैत -संज्ञा पुं० दे० "बहुबाज़" । लड़ंत पंशा खो० लड़ाई । भिड़ंत । लड़-संज्ञा स्त्री० एक ही प्रकार की - वस्तुओं की पंक्ति । माला | लड़कई +-संशा खो० दे० "लड़कपन" । लड़कखेल -संज्ञा पुं० बालकों का खेल | लड़कपन -संज्ञा पुं० १. वह अवस्था जिसमें मनुष्य बालक हो । २. चप लता । चंचलता । लड़कबुद्धि-संशा बी० नासमझो । लड़का -संज्ञा पुं० [स्त्री० लड़की ] १. बालक । २. पुत्र । लड़का - बाला -संज्ञा पुं० संतान । लड़कौरी - वि० स्त्री० जिसकी गोद में लड़का हो । लड़खड़ाना- क्रि० प्र० पूर्ण रूप से स्थित न रहने के कारण इधर-उधर झुक पड़ना । लड़ना - क्रि० प्र० १. भिड़ना । २. मल्ल-युद्ध करना । ३. हुज्जत करना।
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