लपेटना या भाव। २. घेरा । ३. घुमाव । लपेटना- क्रि० स० घुमाव या फेरे के साथ चारों ओर फँसाना । लफंगा - वि० १. लंपट । २. शोहदा । लफ्ज़ - संज्ञा पुं० शब्द । लबड़-धोध - संथा स्त्री० १. झूठमूठ का हल्ला । २. गड़बड़ी । लबादा -संज्ञा पुं० रूईदार चोगा । लबार | - वि० झूठा । मिथ्यावादी । लबारी - संज्ञा स्त्री० झूठ बोलने का काम । मुँह या किनारे लबालब - क्रि० वि० तक | छलकता हुथा । लबेदा - संज्ञा पुं० [बी० भल्पा० लबेदी ] मोटा बड़ा डंडा । लब्ध- वि० १. मिला हुआ । २. भाग करने से श्राया हुआ फल । (गणित) लब्धप्रतिष्ठ- वि० प्रतिष्ठित । लभ्य - वि० पाने योग्य । लमकना । क्रि० प्र० उत्कंठित होना । - लमतड़ंग - वि० [स्त्री० लमतड़ गी] बहुत लंबा या ऊँचा । ६६३ लमधी -संज्ञा पुं० समधी का बाप । लमानाः । - क्रि० स० लंबा करना । लय- संज्ञा पुं० १. एक पदार्थ का दूसरे में मिलना । २. विलीन होना । ३. संगीत में नृत्य, गीत और वाद्य की समता । संज्ञा खी० १. गीत गाने का ढंग या त । धुन । २. संगीत में सम । लरकई- संज्ञा श्री० दे० "लड़कपन" । लरकिनी -संज्ञा स्त्री० दे० "लड़की" । लरजना- क्रि० प्र० १. कपिना । २. डरना । करभर - वि० बहुत अधिक । करभरÌ- ललित कला लरिकई-संज्ञा खी० दे० "लड़क- पन" । लरिक- सलोरी /-संशा की० लड़कों का खेल | खेलवाड़ । लरिका+-संज्ञा पुं० दे० "लड़का " । लरी - संज्ञा स्त्री० दे० "लड़ी" । ललक - संज्ञा बी० प्रबल अभिलाषा । ललकना - क्रि० प्र० पाने की गहरी इच्छा करना । ललकार - संज्ञा स्त्री० ललकारने की क्रिया या भाव । ललकारना- क्रि० स० युद्ध या प्रति- द्वद्विता के लिये उच्च स्वर से आह्वान करना । ललचना- क्रि० भ० लालच करना । ललचाना- क्रि० स० किसी के मन में बालच उध्पा करना । ललचौहाँ - वि० लालच से भरा । ललचाया हुआ । ललन - संज्ञा पुं० १. प्यारा बालक | २. प्रिय नायक या पति । ललना-संज्ञा स्त्री० स्त्री । कामिनी । लला - संज्ञा पुं० [स्त्री० लली] १. प्यारा या दुखारा लड़का । २. प्रिय नायक या पति । ललाई-संज्ञा खो० दे० "लाली" । ललाट-संश पुं० भाल । मस्तक | ललाट- रेखा-संज्ञा स्त्री० कपाल का लेख | ललाना+- क्रि० भ० लेाभ करना । ललचना । ललाम - वि० रमणीय | सुंदर । ललित - वि० सुंदर । मनेोहर । ललित कला-संज्ञा स्त्री० वे कलाएँ जिनके व्यक्त करने में किसी प्रकार के सौंदर्य की अपेक्षा हो । जैसे-
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