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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/६७२

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छठिता संगीत, चित्रकला, वास्तुकला आदि । ललिता - संज्ञा स्त्री० राधिका की प्र- धान आठ सखियों में से एक। लली - संज्ञा स्त्री० १. लड़की के लिये प्यार का शब्द । २. नायिका । ललौह - वि० [ खी० ललौहीं ] बलाई लिए हुए । लल्ला - संज्ञा पुं० दे० "बला" । लल्लो-चप्पा - संज्ञा खो० चिकनी-चुपड़ी घात । ठकुरसोद्दाती । लल्लोपत्तो +-संज्ञा बी० दे० "ललो- चप्पो" । लवंग-संज्ञा पुं० लोग । छव-संज्ञा पुं० १. बहुत थोड़ी मात्रा । २. श्री रामचंद्र के दो यमज पुत्रों में से एक । लवण-संज्ञा पुं० नमक । नान । लवणासुर - संज्ञा पुं० मधु नामक - सुर का पुत्र जिसे शत्रुघ्न ने मारा था । लवन-संज्ञा पुं० १. काटना । २. खेत की कटाई । लुनाई । लघनाई - संज्ञा स्त्री० दे० " लावण्य" । लवनि, लवनी - संज्ञा स्त्री० खेत में अनाज की पकी फसल की कटाई । लुनाई । - लवर | संज्ञा स्त्री० श्रभि की लपट । लवलीन - वि० तन्मय । तल्लीन । मन । लवलेश- संज्ञा पुं० अत्यंत अल्प मात्रा | लवा+-संज्ञा पुं० भुने हुए धान या ज्वार की खील । संज्ञा पुं० तीतर की जाति का एक पक्षी । लवाई - वि० वह गाय जिसका बच्चा अभी बहुत ही छोटा हो । धारा-संज्ञा पुं० गौ का बच्चा । દુષ્ટ लवासी - वि० १. गुप्पी | लंपट | लहक १. लशकर - संज्ञा पुं० सेना । फ़ौज । लशकरी - वि० १. फ़ौज का । २. जहाज़ पर काम करनेवाला | संज्ञा स्त्री० जहाज़ियों या ख़लासियों की भाषा । लषन - संज्ञा पुं० दे० " लखन" । लस - संज्ञा पुं० १. चिपकने या चिप- काने का गुण | २. वह जिसके लगाव से एक वस्तु दूसरी वस्तु से चित्रक जाय । लसदार - वि० जसीला । लसना - क्रि० स० एक वस्तु को दूसरी वस्तु के साथ सटाना ।

  • क्रि० प्र० शोभित होना ।

लसलसा - वि० दे० " लसदार" । लसी-संज्ञा स्त्री० दूध और पानी मिला शरबत | लसीला - वि० [स्त्री० लसीली] १. जस- दार । २. सुंदर । लसोड़ा - संथा पुं० एक प्रकार का पेड़ जिसके फल श्रौषध के काम में आते हैं। लस्टम पस्टम - क्रि० वि० किसी न किसी तरह से । ज्यों-त्यों । लस्त - वि० थका हुआ । लस्सी - संभा श्री० चिपचिपाहट । लसी । लहँगा - संज्ञा पुं० कमर के नीचे का सारा अंग ढांकने के लिये स्त्रियों का एक घेरदार पहनावा । छहक - संज्ञा खी० १. बहकने की क्रिया या भाव । २. आग की खपट ।