लामे वि० दे० "लंबा" | लामे 1- क्रि० वि० दूर । लाय - संज्ञा स्त्री० लपट । लायक - वि० १. ४चित । ठीक । २. सुयेाग्य । गुणवान् । लायकी संज्ञा स्त्री० लायक होने का भाव या धर्म । लार-संज्ञा स्त्री० वह पतला लसदार थूक जो मुँह में से तार के रूप में निकलता है । लाल - संज्ञा पुं० १. छोटा और प्रिय बालक । २. एक प्रसिद्ध छोटी चिड़िया । संज्ञा पुं० दे० "मानिक" । वि० १. रक्तवर्ण । २. बहुत अधिक क्रुद्ध । - । लालच संज्ञा पुं० [वि० लालची ] कोई चीज़ पाने की बहुत बुरी तरह इच्छा करना । लालची - वि० लोभी । लालटेन - संज्ञा स्त्री० किसी प्रकार का वह खाना आदि जिसमें तेल का खज़ाना और जलाने के लिये बत्ती लगी रहती है, और जिसके चारों और शीशा या कोई पारदर्शी पदार्थ लगा रहता है। कंदील | लालड़ी - संज्ञा पुं० एक प्रकार का टाल नगीना । लालन- संज्ञा पुं० प्रेमपूर्वक बालकों का आदर करना । मंज्ञा पुं० प्रिय पुत्र । प्यारा बच्चा । लालना- क्रि० स० दुलार करना । प्यार करना / लालबुझक्कड़ - संज्ञा पुं० बासों का अटकल पच्चू मतलब लगानेवाला । लाल मिर्च- संज्ञा स्त्री० दे० "मिर्च" । ६६७ लावारिस लालसा - संज्ञा श्री० बहुत अधिक इच्छा या चाह । लाल सागर - संज्ञा पुं० भारतीय महा- जो अरब और पड़ता है 1 सागर का वह अंश अफ्रिका के मध्य में लालसिखी - पुं० मुर्गा । लालसी - वि० अभिलाषा या इच्छा करनेवाला | लाला - संज्ञा पुं० १. एक प्रकार का संबोधन | महाशय । २. कायस्थ जाति का सूचक एक शब्द । ३. छोटे प्रिय बच्चे के लिये संबोधन । संज्ञा पुं० पोस्त का लाल रंग का फूल । लालायित - वि० ललचाया हुआ । लालित - वि० दुलारा । प्यारा । लालित्य-संज्ञा पुं० ललित का भाव । सौंदर्य । - | लालिमा संज्ञा बी०लाली । लाली - संज्ञा स्त्री० १. लाल होने का भाव । सुर्खी । २. इज्जत । लाषः -संज्ञा स्त्री० श्राग । लावक- संज्ञा पुं० लवा पक्षी । लावण्य- संज्ञा पुं० १. लवण का भाव या धर्म । २. अत्यंत सुंदरता । लावदार - वि० (तोप) जो छोड़ी जाने या रंजक देने के लिये तैयार हो । लावनी -संज्ञा बी० एक प्रकार का छंद । लावल्द - वि० निःसंतान । लाघा -संज्ञा पुं० भूना हुआ धान, या रामदाना यादि जो भुनने के कारण फूटकर फूल जाता है । खील । लाधा- परछन -संज्ञा पुं० विवाह के समय की एक रीति । ख्याल । लावारिस - संज्ञा पुं० [वि० लावारिसी ] वह जिसका कोई उत्तराधिकारी या
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