काश वारिस न हो । लाश - संज्ञा स्त्री० किसी प्राणी का मृतक देह । शव | लासा - संज्ञा पुं० कोई लसदार चीज़ । लुश्राव । लासानी - वि० द्वितीय । बेजोड़ । लास्य-संज्ञा पुं० १. नृत्य । नाच । २. वह नृत्य जो कोमल अंगों के द्वारा हो और जिससे शृंगार आदि कोमल रसों का उद्दीपन होता हो । लाह - संज्ञा स्त्री० लाख । चपड़ा । संज्ञा पुं० लाभ | नफा । लाहु -संज्ञा पुं० नफा । लाभ । लाहौल-संज्ञा पुं० एक अरबी वाक्य का पहला शब्द जिसका व्यवहार प्रायः भूत-प्रेत यादि को भगाने या घृणा प्रकट करने के लिये किया जाता 1 लिंग - संज्ञा पुं० १. चिह्न । लक्षण । निशान । २. गुप्त इंद्रिय । ३. शिव की एक विशेष प्रकार की मूर्ति | ४. व्याकरण में वह भेद जिससे पुरुष और स्त्री का पता लगता है । है । लिंगदेह - संज्ञा पुं० वह सूक्ष्म शरीर जो इस स्थूल शरीर के नष्ट होने पर भी कर्मों के फल भोगने के लिये जीवात्मा के साथ लगा रहता ( अध्यात्म ) लिंगायत-संज्ञा पुं० एक शैव संप्रदाय जिसका प्रचार दक्षिण में बहुत है । लिंगेंद्रिय -संज्ञा पुं० पुरुषों की मूत्र- द्विय । लिए - हिंदी का एक कारक चिह्न जो संप्रदान में आता है । ६६८ लिपाना लिक्खाड़-संज्ञा पुं० बहुत लिखने- वाला । भारी लेखक । ( "यंग्य ) लिखधारक-संज्ञा पुं० लिखनेवाला । मुहर्रिर या मुंशी । लिखना- क्रि० स० १. चिह्न करना । २. स्याही में डूबी हुई कुलम से अक्षरों की आकृति बनाना । लिखाई -संज्ञा स्त्री० लिखने का ढंग । मज़दूरी | १. लेख । २. ३. लिखने की लिखाना - क्रि० स० दूसरे के द्वारा लिखने का काम कराना । लिखापढ़ो -संज्ञा स्त्री० -संज्ञा स्त्री० १ लिखने- पढ़ने का काम । २. पत्र-व्यवहार । ३. किसी विषय को कागज पर लिख- कर निश्चित या पक्का करना । लिखावट-संज्ञा स्त्री० लिखने का ढंग लिखित - वि० लिखा हुआ । श्रंकित । लिच्छवि-संज्ञा पुं० एक इतिहास - प्रसिद्ध राजवंश जिसका राज्य नेपाल, मगध और कौशल में था । लिटाना - क्रि० स० दूसरे को लेटने में प्रवृत्त करना । । लिट्ट-संज्ञा पुं० [ खो० भल्पा० लिट्टीं ] मोटी रोटी । बाटी । लिपटना- कि० भ० एक वस्तु का दूसरी को घेरकर उससे खूब सट जाना । चिपटना 1 लिपटाना - क्रि० स० १. चिमटाना । २. आलिंगन करना । लिपना- क्रि० म० लीपा या पोता जाना । लिवाई -संज्ञा स्त्री० लीपने की क्रिया, भाव या मज़दूरी | लिपाना- क्रि० स० रंग या किसी
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