लुरकी लुर की संज्ञा खी० कान में पहनने की बाली । मुरकी । १. भूलना । लुरना +- क्रि० प्र० लहराना । २. झुक पड़ना । लुरी - संज्ञा श्री० वह गाय जिसे बच्चा दिए थोड़े ही दिन हुए हों । लुहार - संज्ञा पुं० [स्त्री० लुहारिन, लुहारी ] १. ले | हे की चीजें बनाने- वाला । २. वह जाति जो लोहे की चीज़ बनाती है । लुहारी - संज्ञा स्त्री० लुहार जाति की - स्त्री । लू-संज्ञा स्त्री० गरमी के दिनों की तपी हुई हवा | लूक -संज्ञा स्त्री० १. श्राग की लपट । २. लू । गर्म हवा । लूकना - क्रि० स० श्राग लगाना । जलाना । लूका -संज्ञा पुं० [ श्री० भल्पा० लूको ] आग की लौ या लपट । लूकी | -संज्ञा स्त्री० श्राग की चिनगारी । स्फुलिंग | लूगा + - संज्ञा पुं० १. वस्त्र । कपड़ा । २. घेती । लूट -संज्ञा खी० किसी के माल का ज़बरदस्ती छीना जाना । लूटना- क्रि० स० मार-पीटकर या छीन झपटकर ले लेना । लूत संज्ञा स्त्री० मकड़ी । - लूता-संज्ञा खो० मकड़ी । लूमना - क्रि० प्र० लटकना । लूरना - क्रि० प्र० दे० "लुरना" । लूला- वि० [ खी० लूली ] जिसका हाथ कट गया हो । लुंजा । लड़-संज्ञा पुं० दे० "लेंड़ी" । लेडी - संज्ञा खी० १. मल की बत्ती । ६७१ लेन-देन २. बकरी या ऊँट की मैगनी । लैहड़, लेहड़ा - संत पुं० कुंड दल । समूह । (चौपायों के लिये) ले- भव्य आरंभ होकर । ० 1 अव्य० तक । पर्पत । लेई -संज्ञा स्त्री० किसी चूर्ण को गाढ़ा करके बनाया हुआ बसीला पदार्थ । लेख - संग पुं० १. लिखे हुए अक्षर । २. निबंध | लेखक -संज्ञा पुं० [ स्त्री० लेखिका ] १. लिखनेवाला । २. ग्रंथकार । लेखन - संज्ञा पुं० [वि० लेखनीय, लेख्य ] लिखने का कार्य्यं । लेखना- क्रि० स० चित्र बनाना । गिनना । १. अक्षर या लिखना । २. लेखनी -संज्ञा खी० कृतम । लेखा -संज्ञा पुं० १. गणना । गिनती । २. ठीक ठीक अंदाज़ | ३. श्राय. व्यय का विवरण । लेखिका - संज्ञा स्त्री० १. लिखनेवाली । २. ग्रंथ या पुस्तक बनानेवाली । लेख्य - वि० लिखने योग्य | लेज़म-संज्ञा स्त्री० एक प्रकार की नरम और लचकदार कमान । लेजुर, तेजुरी | -संज्ञा स्त्री० १. डोरी । २. कुएँ से पानी खींचने की रस्सी । लेटना- क्रि० भ० पैौढ़ना । साना । लेटाना - क्रि० स० दूसरे की लेटने में प्रवृत्त करना । लेन-संज्ञा पुं० लेने की क्रिया या भाव । लेनदार - संज्ञा पुं० जिसका कुछ बाकी हो । महाजन | लेन-देन -संज्ञा पुं० १. लेने और देने
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