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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/६८९

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वसुदा गया जिसके अंतर्गत धाठ देवता हैं। २. रत । वसुदा -संज्ञा स्त्री० पृथ्वी । वसुदेव-संज्ञा पुं० यदुवंशियों के शूर- कुल के एक राजा जो श्रीकृष्ण के पिता थे । वसुधा-संज्ञा स्त्री० पृथ्वी । वसुधारा-संज्ञा श्री० जैनों की एक देवी । -- २. वसुमती संज्ञा स्त्री० पृथ्वी । वसूल - वि० १. १. मिला हुआ । जो चुका लिया गया हो । वसुली - संज्ञा स्त्री० दूसरे से रुपया- पैसा या वस्तु लेने का काम । वस्ति-संज्ञा स्त्री० १. पेड़ 1 मूत्राशय । २. वस्तिकर्म-संज्ञा पुं० लिंगेंद्रिय, गुर्दे- द्विय आदि मार्गों में पिचकारी देना । वस्तु-संशा खो० [वि० वास्तव, वास्तविक ] १ वह जिसका अस्तित्व या सत्ता हो । २. गोवर पदार्थ । चीज़ । वस्तुतः - भव्य ० यथार्थतः । सचमुच । वस्त्र -संज्ञा पुं० कपड़ा । वस्ल -संज्ञा पुं० दो चीज़ों का मेल । मिलन | वह - सर्व० एक शब्द जिसके द्वारा किसी तीसरे मनुष्य का संकेत किया जाता है । वहन -संज्ञा पुं० [वि० बहनोय, वहमान, वहित ] खींचकर अथवा सिर या कंधे पर लादकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाना । वहम-संज्ञा पुं० मिथ्या धाग्या । झूठा वयात । पहमी - वि० वहम करनेवाला । वहशत - संघा जी० जंगलीपन । ग्रस- ६८१ भ्यता । धाक़फियत वहशी - वि० जंगल में रहनेवाला । वहाँ प्रव्य० उस जगह । वहाबी - संज्ञा पुं० अब्दुल वहाब नदी का चलाया हुआ मुसलमानों का एक संप्रदाय । वहिः - भव्य ० जो अंदर न हो। बाहर । वद्दित्र -संज्ञा पुं० जहाज़ | वहिरंग - संज्ञा पुं० १. शरीर का बाहरी भाग । २. बाहरी भाग | वहिर्गत वि० जो निकला हुआ । वहिष्कृत - वि० बाहर गया हो । १. बाहर निकाला हुश्रा । २. त्यागा हुआ । वहीं - अव्य० उसी जगह । वही - सर्व० उस तृतीय व्यक्ति की ओर निश्चित रूप से संकेत करनेवाला सर्वनाम, जिसके संबंध में कुछ कहा जा चुका हो । वह्नि - संज्ञा पुं० श्रनि । वांछनीय - वि० चाहने योग्य । वांछा -संज्ञा स्त्री० [वि० वांछित, बांछ- नाय ] इच्छा । अभिलाषा । चाह । वांछित - वि० इच्छित । चाहा हुआ । वा- प्रव्य० विकल्प या संदेहवाचक शब्द । या । अथवा |

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  • सर्व० व्रजभाषा में प्रथम पुरुष

का वह एकवचन रूप जो कारक- चिह्न लगने के पहले उसे प्राप्त होता है। जैसे—वाकों, वालें । वाक - संज्ञा पुं० १. वाणी । २ सरस्वती । वाक़ई - वि० सच । वास्तव ! अव्य० सचमुच । यथार्थ में । घाक़फियत - संज्ञा स्त्री० १. जानकारी । २. परिचय |