वाकया वाकया-संवा पुं० १. घटना । समाचार | ६८२ २. वाकिफ - वि० १. जानकार । ज्ञाता । २. जानकारी रखनेवाला । अनुभवी । चाक छल-संज्ञा पुं० न्यायशास्त्र के अनुमार छल के तीन भेदों में से एक। वाकपटु - वि० बात करने में चतुर । वाक फियत संज्ञा बी० जानकारी । वाक्ये -संज्ञा पुं० वह पद समूह जिससे श्रोता को वक्ता के अभिप्राय का बोध हो । जुमला । धाकसिद्धि-संज्ञा स्त्री० इस प्रकार की सिद्धि या शक्ति कि जो बात मुँह से निकले, वह ठीक घटे । वागीश - संज्ञा पुं० १. बृहस्पति । २. कवि | वि० अच्छा बोलनेवाला । घागीश्वरी - संज्ञा स्त्री० सरस्वती । वाग्दत्त - वि० जिसे दूसरे को देने के लिये कह चुके हैं। । वाग्दत्ता-संशा बी० वह कन्या जिसके विवाह की बात किसी के साथ ठह- राई जा चुकी हो । वाग्दान -संज्ञा पुं० कन्या के पिता का किसी से जाकर यह कहना कि मैं अपनी कन्या तुम्हें ब्याहूँगा । वाग्मी - संथा पुं० १. अच्छा वक्ता । २. पंडित । वाग्विलास-संज्ञा पुं० श्रानंदपूर्वक परस्पर बात-चीत करना । वाङमय - वि० वचन द्वारा किया हुभो । संज्ञा पुं० साहित्य | वाघ -संज्ञा की० वाचा । वाणी । वाच - संज्ञा सी० के० " वाच" । घाट वाचक- वि० बतानेवाला । वाचन-संज्ञा पुं० पढ़ना । वाचनालय - संज्ञा पुं० वह स्थान जहाँ बैठकर लोग समाचार पत्र या पुस्तकें आदि पढते हों । वाचस्पति - संज्ञा पुं० बृहस्पति । घाचा - संज्ञा स्त्री० १. वाणी । वचन । २. वाचाबंध - वि० प्रतिज्ञाबद्ध । वाचाल - वि० १. बोलने में तेज़ । २. चकवादी । याबी - वि० प्रकट करनेवाला। सूचक । वाच्य - वि० कहने योग्य । संज्ञा पुं० १. अभिधेयार्थ । २. दे० "वाच्यार्थ" । वाच्यार्थ -संज्ञा पुं० वह अभिप्राय जो शब्दों के नियत अर्थ द्वारा ही प्रकट हो । मूल शब्दार्थ | वाच्यावाच्य-संज्ञा पुं० भली-बुरी या कहन न कहने योग्य बात । बाजपेई : संज्ञा पु० दे० "वाजपेयी" । वाजपेय-संज्ञा पुं० एक प्रसिद्ध यज्ञ, जो सात श्रौत यज्ञों में पांचवीं है। वाजपेयी - संज्ञा पुं० १. वह पुरुष जिसने वाजपेय यज्ञ किया हो । २. ब्राह्मणों की एक उपाधि । ३. अत्यंत कुलीन पुरुष | वाजसनेय-संज्ञा पुं० यजुर्वेद की एक शाखा । । ठीक | । ठीक । वाजिब - वि० उचित । वाजिबी - वि० सचित । वाजी-संज्ञा पुं० घोड़ा । वाजीकरण-संज्ञा पुं० वह आयुर्वेदिक प्रयोग जिससे मनुष्य में वीर्य की वृद्धि हो । वाट-संज्ञा पुं० मार्ग । राखा '
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