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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/६९७

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चिद्रुम ६८६ प्रवाह किस बज्र कितना और प्रवाह किस भोर है। विद्रुम - संज्ञा पुं० मूँगा । विद्रोह - संज्ञा पुं० बलवा । विद्रोही - संधा पुं० बाग़ी। विद्वत्ता-संज्ञा खी० पांडित्य | विद्वान् -संज्ञा पुं० पंडित । विद्वेष- संज्ञा पुं० शत्रुता । वित-संज्ञा पुं० नाश । वि० विनष्ट | विध संज्ञा पुं० ब्रह्मा । विधना- क्रि० स० प्राप्त करना । संज्ञा स्त्री० भवितव्यता । होनी । संज्ञा पुं० ब्रह्मा । विध-संज्ञा पुं० पराया धर्म्म । विधर्मी -संज्ञा पुं० १. धर्म्मभ्रष्ट । २. किसी दूसरे धर्म्म का अनुयायी । विधवा -संज्ञा बी० वह स्त्री जिसका पति मर गया हो । विधवापन-संज्ञा पुं० रंड़ापा । विधवाश्रम -संज्ञा पुं० वह स्थान जहाँ विधवाओं के पालन-पोषण आदि का प्रबंध किया जाता है । विधाता - संज्ञा पुं० १. विधान करने- चाळा । २. ब्रह्मा या ईश्वर । विधान-संज्ञा पुं० १. अनुष्ठान । २. व्यवस्था । ३. पद्धति । विधायक - संज्ञा पुं० विधान करने- वाला । विधि - संज्ञा स्त्री० १. ढंग । २. व्य- वस्था । ३. व्याकरण में क्रिया का वह रूप जिसके द्वारा किसी को कोई काम करने का आदेश किया जाता है। संज्ञा पुं० ब्रह्मा । विधिपुर - संज्ञा पुं० ब्रह्मलोक । ४४ विनसना विधिवत - क्रि० वि० १. विधिपूर्वक | २. जैसा चाहिए । विधुतुद-संज्ञा पुं० राहु । विधु -संज्ञा पुं० १. चंद्रमा । २. ब्रह्मा । विधुदार-संज्ञा पुं० चंद्रमा की स्त्री, रोहिणी । विधुबधु- संज्ञा पुं० कुमुद का फूल । विधुर - संज्ञा पुं० १. दुःखी । २. घबराया हुआ । विधुवदनी - संज्ञा स्त्री० सुंदरी स्त्री । विधेय - वि० १. जिसका विधान या अनुष्ठान उचित हो । २. वह (शब्द या वाक्य) जिसके द्वारा किसी के संबंध में कुछ कहा जाय । विध्वंस-संज्ञा पुं० नाश । विध्वंसी-संज्ञा पुं० नाश या बरबाद करनेवाला । विध्वस्त- वि० नष्ट किया हुआ । विनत - वि० १. झुका हुआ । २. विनीत | विनता-संज्ञा श्री० दक्ष प्रजापति की एक कन्या जो कश्यप की सो और गरुड़ की माता थी । विनति - संज्ञा श्री० १. झुकाव । नम्रता । ३. प्रार्थना । विनती-संशा बी० दे० "विनति" । विनम्र - वि० २. १. झुका हुआ । २० विनीत | विनय -संज्ञा बी० १. नम्रता । २. प्रार्थना । विनयशील - वि० नम्र विनयी - वि० मन्त्र । विनश्वर - वि० भविस्य । विनष्ट - वि० १. जो बरबाद हो गया हो । २. मृत । विनसनाक क्रि० भ० नष्ट होना ।