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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/७०५

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वृद्धश्रवा पांडित्य | वृद्धश्रवा - संज्ञा पुं० इंद्र | वृद्धा - संज्ञा जी० वह स्त्री जो अवस्था में वृद्ध हो गई हो । वृद्धि - संज्ञा जी० १. बढ़ती । अभ्युदय । २. २. पापी वृष -संज्ञा पुं० १. साँड़ । २. काम- शास्त्र के अनुसार चार प्रकार के पुरुषों में से एक । वृषकेतन - संज्ञा पुं० शिव । वृषकेतु - संज्ञा पुं० शिव । वृषध्वज-संज्ञा पुं० शिव । वृषभ - संज्ञा पुं० बैज या सड़ । वृषभध्वज - संज्ञा पु० शिव । वृषल - सज्ञा पुं० १. शूद । और दुष्कर्मी । वृषळी - संज्ञा श्री० कुलटा । वृषवामी - संज्ञा पुं० शिवजी । वृष्टि - संज्ञा स्त्री० वर्षा । वृष्णि - संज्ञा पुं० मेव । वृहती - संज्ञा स्त्री० कंटकारी । वृहत् वि० बड़ा भारी । - वृहद्रथ- संज्ञा पुं० इंद्र | वृहन्नला - संज्ञा श्री० अर्जुन का उस समय का नाम जब वे प्रज्ञातवास में राजा विराट के यहाँ स्त्री के वेश में रहते थे । 1 । 1 बृहस्पति-संज्ञा पुं० दे० "बृहस्पति" । वेंकटगिरि-संज्ञा पुं० दक्षिण भारत के एक पर्वत का नाम । वेग-संज्ञा पुं० १. प्रवाह । २. तेज़ी । वेगवान् वि० तेज़ चलनेवाला । वेगी-संज्ञा पुं० वेगवान् । - वेणी -संज्ञा श्री० स्त्रियों के बालों की गूँथी हुई चोटी । ६६७ वेणु - संज्ञा पुं० १. बाँस । की बनी हुई वंशी । वेधशाला २. बस वेतन-संचा पुं० १. उजरत । २. दर- माहा । वेतनभोगी - संज्ञा पुं० वह जो वेतन लेकर काम करता हो । वेताल - संज्ञा पुं० द्वारपाल | वेता - वि० जाननेवाला । क्षेत्र - संज्ञा पुं० बेंत । वेत्रवती - संज्ञा श्री० बेतवा नदी । वेद-संज्ञा पुं० १. किसी विषय का, विशेषतः धामिक या आध्यात्मिक विषय का सच्चा और वास्तविक ज्ञान । २. प्रार्थी के सर्वप्रधान और सर्व- मान्य धार्मिक ग्रंथ जिनकी संख्या चार 1 वेदश -संज्ञा पुं० १. वह जो वेदों का ज्ञाता हो । २. ब्रह्मज्ञानी । वेदना - संज्ञा बी० पीड़ा । वेदमंत्र - संज्ञा पुं० वेदों में के मंत्र । वेदवाक्य -संज्ञा पुं० पूर्ण रूप से प्रा- माणिक बात, जिसका खंडन न हो सकता हो । वेदांग - संज्ञा पुं० वेदों के अंग या शास्त्र जो छः हैं । वेदांत -संज्ञा पुं० छः दर्शने में से प्रधान दर्शन | अद्वैतवाद । वेदांतसूत्र - संज्ञा पुं० महर्षि वादरा- या कृत सूत्र जो वेदांत शास्त्र के मूल माने जाते हैं । वेदांती - संज्ञा पुं० ब्रह्मवादी । वेदी -संज्ञा स्त्री० किसी शुभ कार्य, विशेषतः धार्मिक कार्य के लिये तैयार की हुई ऊँची भूमि । वेध - संज्ञा पुं० छेदना । वेधशाला - संज्ञा स्त्री० वह स्थान जहाँ