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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/७०९

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व्यायाम व्यायाम -संज्ञा पुं० १. कसरत । २. परिश्रम । व्याल -संज्ञा पुं० १. सपि । २. बाघ । ३. राजा । व्यालू -संज्ञा बी०, रात के समय का भोजन । व्यावहारिक - वि० व्यवहार-संबंधी । व्यासंग-संज्ञा पुं० बहुत अधिक प्रा. सक्ति या मनोयोग । ७०१ व्यास - संज्ञा पुं० १. पराशर के पुत्र कृष्ण द्वैपायन जिन्होंने वेदों का संग्रह, विभाग और संपादन किया था । २. कथावाचक । ३. वृत्त के मध्य में एक सिरे से दूसरे सिरे तक खींची गई सरल रेखा । व्याहार-संज्ञा पुं० वाक्य | व्याहृति-संज्ञा बी० कथन । शंख व्योमचारी - संज्ञा पुं० १. देवता । २. पक्षी । - व्योमयान संश पुं० हवाई जहाज़ | व्रज - संज्ञा पुं० १. गमन । २. समूह | व्रजन - संज्ञा पुं० चलना । व्रजभाषा-संज्ञा की० मथुरा, आगरा और इसके आस-पास के प्रदेशों में बोली जानेवाली एक प्रसिद्ध भाषा । व्रज मंडल - संज्ञा पुं० व्रज और उसके आस-पास का प्रदेश । व्रजराज -संज्ञा पुं० श्रीकृष्ण । व्रज्या - संज्ञा स्त्री० १. घूमना । २. गमन । व्रत-संज्ञा पुं० संकल्प | व्रती संज्ञा पुं० वह जिसने किसी प्रकार का व्रत धारण किया हो । व्रात्य - संज्ञा पुं० १. वह जिसके दस संस्कार न हुए हों । म्मण । ३. शरीर । ४. सेना । । व्यूह -संज्ञा पुं० १. समूह । २. नि. २. दोगला । व्योम -संज्ञा पुं० १. आकाश । २. व्रीडा-संज्ञा श्री० लज्जा । जल । ३. बादल । व्रीहि संज्ञा पुं० धान। चावल । श श - हिंदी वर्णमाला में व्यंजन का शंकराचार्य्य-संज्ञा पुं० भद्वैत मत के तीसव वर्ण । शं-संज्ञा पुं० कल्याण | मंगल । शंक- संज्ञा पुं० भय । शंकनाथ - क्रि० प्र० शंका करना । शंकर - वि० १. मंगल करनेवाला | २. शुभ । संज्ञा पुं० शिव । शंकर-शैल-संज्ञा पुं० कैलास | शंकर स्वामी-संा पुं० दे० "शंकरा- "चार्य्य" । प्रवर्तक एक प्रसिद्ध शैव आचार्य । शंका- संज्ञा स्त्री० १. डर । २. संदेह । शंकित - वि० [स्त्री० शंकिता ] १. डरा हुआ । २. जिसे संदेह हुआ हो । शंकु -संज्ञा पुं० १. के ई नुकीली वस्तु । २. मेख । । शंख-संज्ञा पुं० एक प्रकार का बड़ा घोंघा जो समुद्र में पाया जाता है। इसका कोष बहुत पवित्र समझा जाता और देवताओं के भागे बाजे