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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/७१६

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शादूल शादूल - संधा पुं० १. चीता । २. सिंह | वि० सर्वश्रेष्ठ । शाळ-संज्ञा पुं० साखू | ७०८ संज्ञा बी० दुशाला । शालग्राम- संज्ञा पुं० विष्णु की पत्थर की मूर्ति । शाळा- संज्ञा श्री० १. घर । २. जगह | शालि-रज्ञा पुं० नदहन धान । शालिधान-संज्ञा पुं० बासमती चावल । शालिहोत्र - संज्ञा पुं० घोड़ा । शालीन - वि० [ भाव० शालीनता ] १. विनीत । २. चतुर । शाल्य- संज्ञा पुं० १. सैभिराज्य के एक राजा जो श्रीकृष्ण द्वारा मारे गए थे । 1 २. एक प्राचीन देश का नाम । शिक्षा शास्त्री - संज्ञा पुं० शाकश । शास्त्रीय - वि० शास्त्र-संबंधी । शाहंशाह - संज्ञा पुं० बादशाहों का बादशाह | शाहंशाही - संज्ञा स्त्री० शाहंशाह का कार्य या भाव। शाह-सज्ञा पु० १. महाराज । २. मुसलमान पृकीरों की उपाधि । शाहज़ादा - संज्ञा पु० [ खी० शाहजादी ] बादशाह का लड़का । शाहाना-वि० राजसी । शाही - वि० शाह या बादशाहों का । शिशपा-संशा बी० १. शीशम का पेड़ । २. अशोक वृक्ष । शिशुपा-सा की० दे० "शिंशपा" । शिकंजा - सा पु० दबाने, कसने या निचोड़ने का यंत्र । शावक - संज्ञा पुं० बच्चा, विशेषतः शिकन- संज्ञा स्त्री० सिकुड़ने से पड़ी पशु या पक्षी का बच्चा । शाश्वत - वि० नित्य । शासक-संज्ञा पुं० [स्त्री० शासिका ] १. वह जो शासन करता हो । हाकिम । शासन-संज्ञा पुं० १. श्राज्ञा । हुकूमत । २. २. २. शासित - वि० [स्त्री० शासिता ] १. जिसका शासन किया जाय । जिसे दंड दिया जाय । शास्ति संज्ञा स्त्री० १. शासन । २. दंड । शास्त्र - संधा पुं० वे धार्मिक ग्रंथ जो लोगों के हित और अनुशासन के लिये बनाए गए हैं। शास्त्रकार-संज्ञा पुं० वह जिसने शास्त्रों की रचना की हो । शास्त्रज्ञ - संज्ञा पुं० शास्त्रवेता । हुई धारी । शिकम-संज्ञा पुं० पेट । उदर । शिकमी काश्तकार -संज्ञा पुं० वह कालकार जिसे जोतने के लिये खेत दूसरे काश्तकार से मिला हो । शिकायत - संज्ञा श्री० १. बुराई करना । चुगली । २. उलाहना । शिकार - संज्ञा पुं० १. जंगली पशुओं को मारने का कार्य या क्रीड़ा । हेर । २. वह जानवर जो मारा गया हो शिकारगाह - संज्ञा बी० शिकार खेलने का स्थान । शिकारी - वि० शिकार करनेवाला । शिक्षक-संज्ञा पुं० शिक्षा देनेवाला । सिखानेवाला | गुरु । शिक्षण- संज्ञा पुं० तालीम । शिक्षा शिक्षा - संज्ञा स्त्री० सीख । तालीम ।