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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/७१८

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शिल्पकार बनाने की कला । कारीगरी । शिल्पकार -संज्ञा पुं० १. शिल्पी । कारीगर । २. राज । शिल्पशास्त्र - संज्ञा पुं० गृह-निर्माण का शास्त्र । ७१० शिल्पी -संशा पुं० राज । थवई । शिव-संज्ञा पुं० १. मंगल | कल्याण । २. हिंदुशों के एक प्रसिद्ध देवता । शिव-निर्माल्य-संज्ञा पुं० वह पदार्थ जो शिवजी को अपित किया गया हो ( ऐसी चीज़ों के ग्रहया करने का निषेध है । ) शिवपुराण- संथा पुं० अठारह पुराणों मे से एक । शिवपुरी - संज्ञा की० काशी । शिवरात्रि - संज्ञा श्री० फाल्गुन बदी चतुर्दशी । 1 शिवलिग संा पुं० महादेव का लिंग या पिंडी जिस्का पूजन होता है शिवलेकि- संज्ञा पुं० कैलास । शिवा संज्ञा स्त्री० १. दुर्गा । २. पार्वती । ३. शृगाली । सियारिन । शिवालय- संज्ञा पुं० १. शिवजी का मंदिर । २. कोई देव मंदिर | शिवाला - संज्ञा पुं० देव मंदिर | शिषि-संज्ञा पुं० राजा उशीनर के पुत्र तथा ययाति के दोहित्र एक राजा जो अपनी दानशीलता के दिये प्रसिद्ध हैं । शिविका-संशा बी० पालकी । डोली । शिविर-संज्ञा पुं० डेरा । खेमा । शिशिर - संज्ञा पुं० १. एक ऋतु जो १. एक ऋतु जो माघ और फाल्गुन मास में होती है । २. हिम । शिशु संज्ञा पुं० छोटा बच्चा विशेषतः शीरा आठ वर्ष तक की अवस्था का बच्चा । शिशुता संज्ञा श्री० बचपन । शिशुनाग - संधा पुं० दे० " शैशुनाग | शिशुपाल- संज्ञा पुं० चेदि देश का एक प्रसिद्ध राजा जिसे श्रीकृष्ण ने मारा था । शिष्ट - वि० पुं० १. अच्छे स्वभाव और श्राचरगवाला । २. सभ्य । सज्जन । ३. भक्षा । शिष्टता-संशा बी ० १. सभ्यता / सज्जनता । २. उत्तमता । श्रेष्ठता । शिष्टाचार - संज्ञा पुं० १. दिखावटी सभ्य व्यवहार । २. अवि भगत । शिष्य-संज्ञा पुं० [ स्त्री० शिष्या ] १. विद्यार्थी । २. शागिर्द । हेला । शिस्त-संज्ञा श्री० मछली पकड़ने का कोटा | शीघ्र क्रि० बि० बिना बिलंब । चट- ण्ट | हद । शीघ्रता - संज्ञा की० जल्दी । फुरती । शीत - वि० टंढा। सर्द | २. संज्ञा पुं० १. जाड़ा | टंढ । । तुषार । ३. जाड़े का मौस्मि । शीत कटिबंध-संज्ञा पु० पृथ्वी उत्तर और दक्षिण के भूमि खंड के वे कल्पित विभाग जो भूमध्य रेखा से २३ अंश उत्तर के बाद और २३३ अंश दक्षिणा के बाद माने गए हैं शीतल - वि० ठंढा । सर्द । शीतल चीनी-संज्ञा स्त्री० कबाब चीनी । शीतलता - संज्ञा खी० ठंढापन । शीतळा-संशा बी० १. १. विस्फोटक रोग । चेचक । २. एक देवी जो इस रोग की अधिष्ठात्री मानी जाती शीरा- संज्ञा पुं० चाशनी ।