७१८ षोडशोपचार च - संस्कृत या हिंदी वर्णमाला के व्यंजन वर्णों में ३१वीं वर्ण या अक्षर | पंड - संज्ञा पुं० १. नामर्द । २. शिव का एक नाम । घट - वि० गिनती में ६ । छः । संज्ञा पुं० छः की संख्या । पटक-संज्ञा पुं० ६ वस्तुनों का समूह। बटुकेर्म-संज्ञा पुं० ब्राह्मणों के छः कर्म-यजन, याजन, अध्ययन, अध्या- पन, दान देना और दान लेना । षटचक्र -संज्ञा पुं० षड़यंत्र | षट्पद - वि० छः पैरोंवाला । मज्ञा पुं० भ्रमर । भौंरा । षटपदी -मशा बी० भ्रमरी । षट्मुख - संज्ञा पुं० कार्त्तिकेय | बटरोग-संज्ञा पुं० १. संगीत के छः रागे-भैरव, मलार, श्रीराग, हिंडोल, मालकोस और दीपक । २. बखेड़ा । षरिपु-संज्ञा पुं० दे० " षड्रिपु” । पटशास्त्र - संज्ञा पुं० हिंदुत्रों के छः दर्शन । षटवांग-संज्ञा पुं० षट्वांग नामक राजर्षि जिन्हें केवल दो घड़ी की साधना से मुक्ति प्राप्त हुई थी । षडंग-मंज्ञा पुं० वेद के छः अंग । वि० जिसके छः अंग या श्रवयव हो । षडानन - वि० जिसे छः मुँह हों । संज्ञा पुं० कार्त्तिकेय । षड्गुण - संज्ञा पुं० छः गुणों का समूह। षडदर्शन - संज्ञा पुं० न्याय, मीमांसा आदि हिंदुओं के छः दर्शन । षड्दर्शनी -संज्ञा पुं० दर्शनों को जाननेवाला । ज्ञानी । षड्यंत्र - संज्ञा पुं० १. किसी के विरुद्ध गुप्त रीति से की गई कार्रवाई । २. जाल । कपटपूर्ण आयोजन | षडरस - संज्ञा पु० छः प्रकार के रस या स्वाद - मधुर, लवण, तिक्त, कटु, कषाय और अम्ल । षडिपु संज्ञा पुं० काम, क्रोध आदि मनुष्य के छः विकार | षष्ठ- वि० जिसका स्थान पांचवें के उपरांत हो। छठा । षष्ठी -संज्ञा स्त्री० १. शुक्ल या कृष्ण पच की छठी तिथि । २ कात्यायनी । दुर्गा । षोड़श - वि० १. सोलहवीं । २. २. जो गिनती में दस से छः अधिक हो । सोलह । संज्ञा पुं० सोलह की संख्या । षोड़श कला-संज्ञा स्त्री० चंद्रमा के सोलह भाग जो क्रम से एक एक करके निकलते और क्षीण होते हैं। षोड़श पूजन-संज्ञा पुं० दे० " षोड़शो- पचार" । है १ घोड़श शृंगार-संज्ञा पुं० पूर्ण श्रृंगार जो सोलह प्रकार का षोड़शी - वि० स्त्री० सोलह वर्ष की ( लड़की या स्त्री ) । संज्ञा स्त्री० दस महाविद्याओं में से एक । षोडशोपचार-संज्ञा पुं० पूजन के पूर्ण श्रंग - श्रावाहन, भासन, अध्य- पाथ, आचमन, मधुपर्क, स्नान, वस्त्राभरण, यज्ञोपवीत, गंध, पुष्प,
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