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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/७२८

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संकोचित संकोचित-संज्ञा पुं० तलवार चलाने का एक ढंग या प्रकार । संकोची - संज्ञा पुं० १. सिकुड़नेवाला । २. शर्म करनेवाला । संक्रमण - संज्ञा पुं० गमन । चलना । संक्रांति - संज्ञा बी० सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना या प्रवेश करने का समय । संक्रामक - वि० जो संसर्ग या छूत आदि के कारण फैलता हो । संक्षिप्त - वि० १. जो संक्षेप में हो । २. थोड़ा । श्रल्प । संक्षिप्त लिपि - मज्ञा स्त्री० एक लेखन- प्रणाली जिसमें थोड़े काल और स्थान में बहुत सी बातें लिखी जा सकती हैं संक्षेप - संज्ञा पु० 1 १. थोड़े में कोई बात कहना । २. कम करना । संक्षेपतः - अव्य० संक्षेप में। थोड़े में । संखिया-संज्ञा पुं० एक बहुत ज़ह रीली प्रसिद्ध सफेद उपधातु या पत्थर । संख्यक - वि० संख्यावाला । संख्या-संज्ञा स्त्री ० १. शुमार । २. अदद | तादाद । संग - संज्ञा पुं० १. मिलन । २. सह- वास | सोहबत | । क्रि० वि० साध । हमराह । संग जराहत -संज्ञा पुं० एक सफेद चिकना पत्थर जो घाव भरने के लिये बहुत उपयोगी होता है । संगठन - संज्ञा पुं० बिखरी हुई शक्तियों या लोगों आदि को इस प्रकार मिलाकर एक करना कि उनमें नवीन बल भ्रा जाय । संगठित - वि० जो भली भाँति व्य- ७२० संग्रह वस्था करके एक में मिलाया हुआ हो। संगत-संशा बी० १. संग रहना । संगति । २. वह मठ जहाँ उदासी या निर्मले साधु रहते हैं । ३. संसर्ग । । संग- तराश-संज्ञा पुं० पत्थर काटने या गढ़नेवाला मज़दूर । संगति-संज्ञा श्री० १. मिलने की क्रिया । मेल । २. संघ । साथ | ३. प्रसंग । संगदिल - वि० कठोरहृदय । निर्दय । दयाहीन | संगम - संज्ञा पुं० १. मिलाप । सम्मे- छन । संयोग । २. दो नदियों के मिलने का स्थान । संगमर्मर-संज्ञा पुं० एक प्रकार का बहुत चिकना, मुलायम और सफद प्रसिद्ध कीमती पत्थर । संग- मूसा - संज्ञा पुं० एक प्रकार का काला चिकना, कीमती पत्थर । संगाती - संज्ञा पुं० १. साथी । २. दोस्त | संगी-संज्ञा पुं० संग रहनेवाला । संज्ञा स्त्री० एक प्रकार का कपड़ा । वि० संगीन । संगीत -संज्ञा पुं० वह कार्य्य जिसमें नाचना, गाना और बजाना तीनों हीं । संगीन - संज्ञा पुं० लोहे का एक नुकीला अस्त्र जो बंदूक के सिरे पर लगाया जाता है 1 वि० १. पत्थर का बना हुआ । २. मोटा | संगृहीत - वि० एकत्र किया हुआ । सङ्कलित । संग्रह -संज्ञा पुं० १. एकत्र करना । संचय । २. वह ग्रंथ जिसमें अनेक विषयों की बात एकत्र की गई हों ।