संजुक्त द्वारा जिलाया जा सकता है। संजुक्त - वि० दे० "संयुक्त" । संजुग-संज्ञा पुं० संग्राम । युद्ध । संजुत - वि० दे० "संयुक्त" । सँजोइक - क्रि० वि० साथ में । सँजोइल :: - वि० अच्छी तरह सजाया हुआ । सुसज्जित । संजोग - संज्ञा पुं० दे० "योग" । सँजोगी-संज्ञा पुं० दे० "संगेगी" । सँजोना + - क्रि० स० सजाना । सँजोवल | - वि० १. सुसज्जित । २. सेना सहित । ३. मावधान । संज्ञावाला। जिसकी संज्ञक - वि० संज्ञा हो । ( यौगिक में ) संज्ञा - संज्ञा स्त्री० १. चेतना । २. बुद्धि । 1 ३. व्याकरण में वह विकारी शब्द जिससे किसी वस्तु या भाव आदि का बोध होता है । संज्ञाहीन - वि० बेहोश | बेसुध । सँभला | - वि० संध्या का । सझवाती-संज्ञा श्रो० १. संध्या के समय जजाया जानेवाला दीपक । २. वह गीत जो संध्या समय गाया जाता है । संभा/- संज्ञा बो० संध्या । शाम । संड मुसंड - वि० हट्टा कट्टा | बहुत | मटा सँड्रसा - संज्ञा पुं० लोहे का एक औज़ार । ७२२ संडा - वि० मोटा-ताज़ा । हृष्ट-पुष्ट | संडास - संज्ञा पुं० कुएँ की तरह का एक प्रकार का गहरा पाखाना । संत-संज्ञा पुं० १. साधु, संन्यासी या त्यागी पुरुष | २. ईश्वर भक्त । धार्मिक पुरुष | संदल संतत भव्य० सदा । निरंतर । बरा- बर | - संतति-संज्ञा बी० बाल-बच्चे । संतपन - संथा पुं० १. अच्छी तरह तपना । २. बहुत दुःख देना । संतप्त - वि० १. जला हुश्वर । दुग्ध । २. दुखी। पीड़ित । संतरण - संज्ञा पुं० अच्छी तरह तैरना या पार होना । संतरा -संज्ञा पुं० एक प्रकार का बड़ा और मीठा नीबू | संतरी -संज्ञा पुं० १. पहरेदार । २० द्वारपाल | संतान-संज्ञा पुं० बाल-बच्चे | संतति । धौलाद । संताप - संज्ञा पुं० १. साप । जलन । २. दुःख । कष्ट | संतापन-संज्ञा पुं० संताप देना । संतापना - क्रि० स० दुःख देना । कष्ट पहुँचाना। संतापित - वि० दे० " संतप्त" । संतापी-संज्ञा पुं० संताप देनेवाला । संती /- - प्रव्य० 1 बदले में । एवड़ में । २. द्वारा । ● संतुष्ट - वि० १. तृप्त । २. जो मान गया हो । संतोख -संज्ञा पुं० दे० "संतोष" । संतोष-संज्ञा पुं० १. सब । २. तृप्ति । ३. प्रसन्नता । सुख । संतोषत-वि० दे० "संतुष्ट " । संतोषी - संज्ञा पुं० वह जो सदा संतोष रखता हो । सब करनेवाला । संदर्भ-संज्ञा पुं० १. रचना | बनावट । २. निबंध | लेख । संदल - संग पुं० श्रीखंड | चंदन ।
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