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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/७३१

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संदली संदली - वि० १. संदल के रंग का हलका पीला ( रंग ) । २. चंदन का । संदिग्ध - वि० १. जिसमें संदेह हो । संदेहपूर्ण । २. जिस पर संदेह हो । संदीपन -संज्ञा पुं० १. उद्दीप्त करने की क्रिया । उद्दीपन । २. कृष्णा के गुरु का नाम । ३. कामदेव के पांच बाणों में से एक । बि० उद्दीपन या उत्तेजन करनेवाला । संदूक - संज्ञा पुं० पेटी । बक्स | संदूकड़ी -संज्ञा स्त्री० छोटा संदूक | संदूर-मंज्ञा पुं० दे० "सिंदू" । संदेश - संज्ञा पुं० १. समाचार । हाल । ख़बर | २. एक प्रकार की बंगला मिठाई | २. संदेसा - संज्ञा पुं० ख़बर । हाल | संदेसी - संज्ञा पुं० सँदेसा ले जाने- वाळा । दूत । बसीठ । संदेह - पंज्ञा पुं० संशय । शंका । शक । संघ-मंशा श्री० दे० "घे" । संधान-मंज्ञा पुं० १. लक्ष्य करने का व्यापार | निशाना लगाना । अन्वेषण | खोज | संधानना- क्रि० स० १. निशाना लगाना । २. बाण छोड़ना । संधि - संज्ञा स्त्री० १. मेल । संयोग । २. जोड़ | ३. राजाओं आदि में होनेवाली वह प्रतिज्ञा जिसके अनु- सार युद्ध बंद किया जाता है। ४. सुलह । २. गांठ । ६. चोरी आदि करने के लिये दीवार में किया हुआ यद। सेंध । ७. बीच की खाली जगह । अवकाश । १० ७२३ संध्या - संज्ञा स्त्री० १. दिन और रात दोनों के मिलने का समय । संचि कावा । २. शाम । ३. श्राय्यों की एक विशिष्ट उपासना । संन्यास - मंज्ञा पुं० भारतीय भाखों के चार श्राश्रमों में से अंतिम आश्रम । संन्यासी-संज्ञा पुं० सैन्यास भ्राश्रम में रहने और उसके नियमों का पालन करनेवाला । संपति -संज्ञा खो० दे० "संपति" । संपत्ति-संज्ञा श्री० १. ऐश्वर्य्य । वैभव । २. धन । दौलत । जायदाद । संपद् - संज्ञा स्त्री० १. सिद्धि । पूर्णता । २. ऐश्वर्य । वैभव । गौरव । ३. सौभाग्य | ०१. । संपदा - संघा श्री० १. धन दौलत | २. ऐश्वर्य । वैभव | संपन्न - वि० १. पूरा किया हुआ । पूर्ण । सिद्ध । २. सहित । ३. दौलतमंद । संपर्क - संज्ञा पुं० १. मिश्रण । लगाव | संसर्ग | वास्ता । संपा -संज्ञा स्त्री० विद्यत् । बिजजी । संपात -संज्ञा पुं० एक साथ गिरना या पड़ना । २. संपाति -संज्ञा पुं० १. एक गीव जो गरुड़ का ज्येष्ठ पुत्र और जटायु का भाई था। २. माली नामक राक्षस का एक पुत्र । संपाती - मंत्र पुं० दे० "संपाति" । संपादक -पंज्ञा पुं० १. कोई काम संपत या पूरा करने वाला । २. तैयार करनेवाला । ५ संपादकीय - वि० संपादक का । संपादन-संज्ञा पुं० १. काम को पूरा करना । २. किसी पुस्तक या संवाद- पत्र भादि को क्रम, पाठ आदि लगा-