संभाषण ७२५ संवादी संभाषण- संज्ञा पुं० कथोपकथन | बातचीत | की क्रिया । सँयोना- क्रि० स० दे० "सँजोना” | संभाषी - वि० कहनेवाला। बोलने संरक्षक -संज्ञा पुं० १. रक्षा करने- वाला । संभाग्य - वि० जिससे बातचीत करना बन्चित हो । संभूत - वि० १. एक साथ उत्पन्न । २. उत्पख । उद्भूत । संभोग - संज्ञा पुं० १. सुखपूर्वक व्य- वहार । २. रति-क्रीड़ा । ३ संयोग श्रृंगार । मिलाप की दशा । संभ्रम -संज्ञा पुं० १. घबराहट । २. सिटपिटाना । ३ श्रादर | गौरव | संभ्रांत - वि० १. घबराया हुआ । उनि । २. सम्मानित । प्रतिष्ठित । संभ्राजना- क्रि० प्र० पूर्णतः सुशो- भित होना । संमत- वि० दे० " सम्मत" । संयत - वि० १. बँधा हुआ । २. बंद किया हुआ । ३. जिसने इंद्रियों और मन को वश में किया हो । निप्रही । संयम - संज्ञा पुं० १. रोक | दाब । २. इंद्रियनिग्रह । चित्तवृत्ति का निरोध । ३. बुरी वस्तुओं से बचने की क्रिया । परहेज़ । ४. योग में ध्यान, धारणा और समाधि का साधन । संयमी - वि० १. आत्मनिग्रही । येोगी । २. परहेज़गार | । संयुक्त - वि० १. जुड़ा हुआ । २. मिला हुआ। ३. संबद्ध । ४. सहित । संयुत - वि० १. जुड़ा हुआ मिला हुआ । २. सहित | संयोग-संज्ञा पुं० १. इतफाक । २. मेज । संयोगी संज्ञा पुं० संयोग करनेवाला । संयोजक -संज्ञा पुं० मिलानेवाला । संयोजन - संज्ञा पुं० जोड़ने या मिलाने वाला । २. देख-रेख और पालन- पोषण करनेवाला । ३. श्राश्रय देनेवाला । संरक्षण -संज्ञा पुं० १. हिफाजत । २० देख-रेख । ३. अधिकार । कुब्ज़ा । संरक्षित - वि० अच्छी तरह से बचाया हुआ । संलक्ष्य - वि० जो लखा जाय । संलग्न - वि० सटा हुआ । संलाप -संज्ञा पुं० वार्त्तालाप | बात- चीत । संवत् -संज्ञा पुं० १. वर्ष साल । २. सन् । ३. महाराज विक्रमादित्य के काल से चती हुई मानी जानेवाली वर्ष - गणना | संवत्सर - संज्ञा पुं० वर्ष । सँवर - संज्ञा स्त्री० स्मरण । याद । संवरण - संज्ञा पुं० १. हटाना । २. बंद करना । ३. श्राच्छादित करना । ४. छिपाना । ५. विग्रह । ६. पसंद करना । ७. कन्या का विवाह के लिये वर या पति चुनना । सँवरना- क्रि० प्र० सजना । अलंकृत होना ।
- क्रि० स० स्मरण करना ।
- सँवरिया - वि० दे० "सविला" । संवर्द्धक संज्ञा पुं० बढ़ानेवाला । संवर्द्धन संघा पुं० १. बढ़ना । २. बढ़ाना । संवाद-पंज्ञा पुं० १. बात-चीत । कथोपकथन । २. खबर । समाचार । संवादी - वि० संवाद या बात-चीत