सँवार करनेवाला । सवार - संज्ञा खी० सँवारने की क्रिया या भाव । सँवारना - क्रि० स० १. सजाना । अलंकृत करना । २. ठीक करना । ३. क्रम से रखना । संवाहन - संज्ञा पुं० उठाकर ले चलना । डोना । संवेद-संज्ञा पुं० १. अनुभव | वेदना । २. बोध । संवेदन - संज्ञा पुं० १. अनुभव करना । २. जताना । १. अनुभव करने योग्य । संवेद्य - वि० २. बताने लायक | संशय - संज्ञा पुं० १. संदेह । शक । २. अाशंका | संशयात्मक - वि० जिसमें संदेह हो । संशयात्मा - संज्ञा पुं० जो किसी बात पर विश्वास न करे । संशयी - वि० शक्की । संशोधक-संज्ञा पुं० सुधारनेवाला । संशोधन- संज्ञा पुं० शुद्ध करना । संशोधित - वि० सुधारा हुआ । संधय - संज्ञा पु० १. संयोग । ७२६ २. सबंध । ३. अवलंब । ४. मकान | संष्टि - वि० १. मिला हुआ । २. आलिंगित | परिरंभित । संस, संसद- संभा पुं० प्राशंका | संसर्ग-संा पुं० संबंध | लगाव | संसर्ग-दोष-संज्ञा पुं० वह बुराई जो विसी के साथ रहने से आवे । संसर्गी - वि० संसर्ग या लगाव रखने- बाबा । संसार-संज्ञा पुं० १. जगत् । २. मध्यक्षेत्रक । ३. गृहस्थी । सृष्टि । संसारी - वि० लौकिक । फसा हुआ । संस्थापन १. संसार-संबंधी । २. संसार की माया में . संसृति-संज्ञा बी० 1 जन्म पर जम्म लेने की परंपरा । श्रावागमन । २. संसार । संसृष्ट - वि० १. मिश्रित । २. शामिल । संसृष्टि- संज्ञा श्री० १. मिलावट । २. घनिष्टता । संस्करण - संज्ञा पुं० १. सुधारना । २. द्विजातियों के लिये विहित संस्कार करना । ३. पुस्तकों की एक बार की छपाई । भ्रावृत्ति । ( श्राधु- निक ) संस्कार-संज्ञा पुं० १. संगत श्रादि का मन पर पड़ा हुआ प्रभाव । २० धर्म की दृष्टि से शुद्ध करना । संस्कारहीन - वि० जिसका संस्कार न हुआ हो । व्रात्य । संस्कृत - वि० १. शुद्ध किया हुआ । २. परिमार्जित । ३. साफ़ किया हुआ । ४. सुधारा हुआ। ५. जिस- का उपनयन आदि संस्कार हुआ हो। सज्ञा श्री० भारतीय चाय की प्रा- चीन साहित्यिक भाषा जिसमें उनके धर्मग्रंथ आदि हैं। देववाणी । सस्कृति-संज्ञा स्त्री० १. शुद्धि । २. सुधार । ३. सभ्यता । शाइस्तगी । संस्था संज्ञा की० संघटित समुदाय । मंडल | सभा । संस्थान- संज्ञा पुं० १. जीवन । २. डेरा घर । ३. बस्ती । संस्थापक-संज्ञा पुं० संस्थापन करने- वाला । संस्थापन-संज्ञा पुं० १. खड़ा करना
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