सजना सजना- क्रि० स० श्रृंगार करना । क्रि० प्र० सुसजित होना । सजल - वि० १. जल से युक्त या पूर्ण । २. सूत्रों से पूर्ण । (ख) सजवाई संघा स्त्री० सजवाने की स्त्री० सजवाने की क्रिया, भाव या मज़दूरी । सजवाना- क्रि० स० किसी के द्वारा सुसज्जित कराना । सज्ञा-संज्ञा स्त्री० दंड । ७२६ सठ्ठी सजन-संज्ञा पुं० भला आदमी | शरीफ | सज्जनता -संज्ञा खी० सज्जन होने का भाव । भलमंसाहत । सैाजन्य । सज्जनताई - संज्ञा स्त्री० दे० "सज्ज- नता" । २. सजा - बी० १. वेष भूषा । सोने की चारपाई । शय्या । ३. दे० " शय्यादान", सजाई - संज्ञा स्त्री० सजाने की क्रिया, सज्जित - वि० भाव या मज़दूरी । सजातीय- वि० • एक जाति या गोत्र का । सजाना-कि० स० १. वस्तुनों को यथास्थान रखना । तरतीब लगाना । २. अलंकृत करना । सजाय : । - पंज्ञा स्त्री० दे० "सजा" | सज़ायाफता, सज़ायाब-संज्ञा पुं० वह जो कैद की सज़ा भोग चुका हो। सजाव-संज्ञा पुं० एक प्रकार का दही । सजावट - संज्ञा श्री० सजित होने का भाव या धर्म । सजीला - वि० १. सजधज के साथ रहनेवाला । २. सुंदर । मनेोहर । सजीव - वि० १. जिसमें प्राण हो । २. श्रजयुक्त । सजीवन -सज्ञा पुं० दे० " संजीवनी" । सजीवन मूल-संज्ञा पुं० दे० " संजी वनी" । सजीवनी मंत्र-संज्ञा पुं० वह कल्पित मंत्र जिसके संबंध में लोगों का वि- श्वास है कि मरे हुए को जिलाने की शक्ति रखता है । • सजूरी -संज्ञा स्त्री० एक प्रकार की मिठाई | सजना- क्रि० स० दे० "सजाना" | सज -संज्ञा पुं० दे० "साज" । सज्जित - वि० १. सजा हुआ । २. श्रावश्यक वस्तुओं से युक्त । सज्जी-संज्ञा श्री० भूरे रंग का एक प्रसिद्ध चार । सजोखार-संज्ञा पुं० दे० "सज्जी" । सज्ञान - वि० १ ज्ञान-युक्त । २. चतुर । सरक-संज्ञा स्त्री० तंबाकू पीने का लंबा लचीला नैवा । सरकना-क्रि० भ० धीरे से खिसक जाना । चंपत होना । सरकाना - क्रि० स० छड़ी, कोड़े आदि से मारना । सरकारी-संज्ञा खो० पतली छड़ी । सरना - कि० भ० चिपकना । सटपटाना-कि० भ० दे० "सिट- पिटाना" । सटर पटर - वि० तुच्छ । मामूली । संज्ञा स्त्री० बखेड़े का या तुच्छ काम । सटाना- क्रि० स० दो चीज़ों के पाव को आपस में मिलाना । सटीक - वि० । ०१. व्याख्या सहित । २. बिलकुल ठीक | सट्टा-संज्ञा पुं० इकरारनामा | सट्टी - संज्ञा बी० वह बाज़ार जिसमें एक ही मेल की चीज़ लोग खाकर बेचते हों । हाट ।
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