सप्तशती कश्यप और त्रि । २. उत्तर दिशा के सात तारे जो ध्रुव के चारों ओर फिरते हुए दिखाई पड़ते हैं । सप्तशती - संज्ञा स्त्री० १. सात सौ का समूह । २, सतसई । सप्ताह - संज्ञा पुं० १. सात दिनों का काल । हफा । २. भागवत की कथा जो सांत ही दिनों में सब पढ़ी या सुनी जाय । सफर - संज्ञा पुं० प्रस्थान | यात्रा | सफर मैना - संज्ञा स्त्री० सेना के वे सिपाही जो खाई श्रादि खोदने को आगे चलते हैं। | सफरी - वि० सफ़र में काम आनेवाला । संज्ञा पुं० १. राह खर्च । २. अमरूद । सफरी - संज्ञा स्त्री० सैौरी मछली । सफल - वि० १. जिसमें फल लगा हो । २. सार्थक | 811 सफलता-संज्ञा खो० सफल होने का भाव । कामयाबी । सफलीभूत - वि० जो सफल हुना हो । जो सिद्ध या पूरा हुआ हो । सफहा- संज्ञा पुं० पृष्ठ | पक्षा । सफा - वि० १. साफ । २. पाक । ३. चिकना । सफाई - संज्ञा स्त्री० १. स्वच्छता । २. मैल या कूड़ा-करकट आदि हटाने की क्रिया । सफाचट - वि० एकदम स्वच्छ । बिल- कुल साफ़ या चिकना । सफीना - संज्ञा पुं० परवाना | सफीर - संज्ञा पुं० एलवी । राजदूत । सफेद - वि० चूने के रंग का । धौला । श्वेत । ७३५ सफ़ेदपोश - संज्ञा पुं० साफ कपड़े सभ्यता पहननेवाला । सफेदा -संज्ञा पुं० १. जस्ते का या भस्म जो दवा तथा रँगाई के काम में आता है । २. श्रम का एक भेद । ३. खरबूज़े का एक भेद । सफ़ेदी संज्ञा खो० सफेद होने का भाव । धवलता । सब - वि० १. जितने हों, कुल । २. सारा । सवक-संज्ञा पुं० पाठ | सबज - वि० दे० " सब्ज़" । सबद -संज्ञा पुं० १. दे० " शब्द " । २. किसी महात्मा के वचन । सब-संज्ञा पुं० कारण | वजह | सबर - संज्ञा पुं० दे० "सब " । सबल - वि० १. बलवान् । २. जिसके साथ सेना हो । सब्ज़ - वि० १. कच्चा और ताज़ा २. हरा । ( फल-फूल आदि )। सब्ज़ी - संज्ञा स्त्री० १. हरियाली । २. हरी तरकारी । ३. भांग | सब्र - संज्ञा पुं० संतोष । धैर्य । सभा - संज्ञा स्त्री० १ परिषद् | मज- लिस । २. वह संस्था जो किसी विषय पर विचार करने के लिये संघटित हो । सभागा - वि० भाग्यवान् । सभागृह-संज्ञा पुं० बहुत से लोगों के एक साथ बैठने का स्थान । सभापति संग पुं० सभा का मुखिया । सभासद संज्ञा पुं० वह जो किसी सभा में सम्मिलित हो । सदस्य । सभ्य-संज्ञा पुं० वह जिसका श्राचार- व्यवहार उत्तम हो । भट्टा श्रादमी । सभ्यता-संज्ञा स्त्री० १. सभ्य होने का भाव । २. सदस्यता ।
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