सरनं जाम सरअंजाम-संज्ञा पुं० सामग्री । सरकंडा - संश ० सरपत की जाति का एक पौधा । 1 सरकना - क्रि० प्र० खिसकना । सरकश - वि० उद्धत । उद्दंड | सरकार-सहा बा० १. मालिक । २. राज्य संस्था | सरकारी- वि० राज्य का । राजकीय | सरखत-संवा ० १ वह दस्तावेज़ पर मकान आदि किराए पर दिए जान की शर्तें होती हैं । २. दिए T चुकाए हुए ऋण आदि 3+ 1 का ब्योरा । २. प्रज्ञास्त्र परवाना । सरग :- सं पुं० दे० "स्वर्ग" । सरगना - पशा पु० सरदार | अगुआ । सर- गर्म - वि० जोशीला । श्रावेश पूर्ण । सम्घा -मा श्री० मधुमक्खी । ७३६ सरजा-सज्ञा ५० १. सरदार । २. सिंह | सरणी - संज्ञा स्त्री० मार्ग । राता । सरद - वि० दे० " सर्द" । सरदई - वि० सरदे के रंग का । हरा- पन लिए पीज़ा । सरदा सज्ञा पुं० एक प्रकार का बहुत बांद्रा खरबूजा | सरदार- मज्ञा पुं० नायक । अगुवा । सरदारी -संज्ञा बी० सरदार का पद या भाव । सरन -संज्ञा स्त्री० दे० "शरण" । सरनदीप - संज्ञा पुं० दे० "सिंहल द्वीप" । सरनाम - वि० प्रसिद्ध । मशहूर । सरनामा -संज्ञा पुं० १. शीर्षक । २. पत्र का आरंभ या संबोधन । ३. पत्र पर लिखा जानेवाला पता । सरपंच संज्ञा पुं० पंचों में बड़ा व्यक्ति । सरवर पंचायत का सभापति । सरपट - क्रि० वि० बहुत तेज़ दौड़ । सरपत संज्ञा पुं० कुश की तरह की एक घास जो छप्पर आदि छाने के काम में श्राती है । सरपरस्त-संज्ञा पुं० अभिभावक | संरक्षक | सरपेच -संज्ञा पुं० पगड़ी के ऊपर लगाने का एक जड़ाऊ गहना । सरपोश - संज्ञा पुं० थाल या तश्तरी ढकने का कपड़ा । सरबंधी- संा पुं० तीरंदाज़ । धनु- घर । स- बराह -संज्ञा पुं० प्रबंधकर्ता । कारिंदा । सरबराहकार - संज्ञा पुं० किसी कार्य का प्रबंध करनेवाला । कारिंदा | सरबस1 - संज्ञा पुं० दे० "सर्वस्व" । सरमा-संज्ञा स्त्री० १. देवताओं की एक प्रसिद्ध कुतिया । ( वैदिक ) २० कुतिया | सरयू -संज्ञा स्त्री० उत्तर भारत की एक प्रसिद्ध नदी । सरराना/- क्रि० प्र० हवा में किसी वस्तु के वेग से चलने का शब्द होना । सरल - वि० १. सीधा । २. निष्कपट । ३ श्रासान | सरलता - संज्ञा स्त्री० १. टेढ़ा न होने का भाव । सीधापन । २. सुगमता । सरल निर्यास-संज्ञा पुं० १. गंधा- बिरोजा । २. तारपीन का तेल | सरवन -संज्ञा पुं० अंधक मुनि के पुत्र जो अपने पिता को एक बहँगी में बैठाकर ढोया करते थे ।
- संज्ञा पुं० दे० "श्श्रवण” ।
सरवर-संक्षा पुं० दे० " सरोवर" |