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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/७५२

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सलीक़ामंद २. तहज़ीब । सभ्यता । सलीका मंद - वि० शऊरदार। तमीज़- दार | सलोता-संज्ञा पुं० एक प्रकार का बहुत मोटा कपड़ा । सलूक -संज्ञा पुं० १. बरताव । २. भलाई । नेकी | उपकार । सलोना - वि० १. जिसमें नमक पड़ा हो । नमकीन | २. रसीला । सुदर । सलोनापन -संज्ञा पुं० सलाना होने का भाव । सहकारी सवाल- संज्ञा पुं० १. मम । २. मांग | सवाल-जवाब- संज्ञा पुं० बहस । वाद- विवाद | सविकल्प - वि० संदेह युक्त | सविता - संज्ञा पुं० सूर्य । सवितापुत्र- पंज्ञा पुं० सूर्य के पुत्र, हिरण्यपाणि । सवितासुत-पंज्ञा पुं० शनैश्वर । सविनय अवज्ञा संज्ञा स्त्री० राज्य की किसी आज्ञा या कानून को न मानना । सवेरा - संज्ञा पुं० प्रातःकाल । सुबह । सल्लम -संज्ञा स्त्री० एक प्रकार का मोटा सवैया-संज्ञा पुं० तौलने का सवा सेर कपड़ा । गजी । गाढ़ा । सवत- संज्ञा स्त्री० दे० "सात" । सवत्स - वि० बच्चे के सहित । सवर्ण - वि० १. समान । सदृश । २. समान वर्ण या जाति का । सर्वांग-संज्ञा पुं० दे० " स्वगि" । सवा-संज्ञा स्त्री० चौधाई सहित | सवाई - संज्ञा स्त्री० [वि० सवा ] १. ऋण का एक प्रकार जिसमें मूल धन का चतुर्थांश व्याज में देना पड़ता है । २. जयपुर के महाराजाओं की एक उपाधि । 1 सवाद-संज्ञा पुं० दे० "स्वाद" । सवादिक - वि० स्वादिष्ट । सवाब- संज्ञा पुं० नेकी । सवार - संज्ञा पुं० वह जो घोड़े पर चढ़ा हो । अश्वारोही । वि० किसी चीज़ पर चढ़ा या बैठा हुआ । सवारी - संशा बी० १. किसी चीज़ पर विशेषतः चलने के लिये चढ़ने की क्रिया । २. चढ़ने की चीज़ । ३. जलूस । का बाट । सव्य - वि० बाय । संज्ञा पुं० यज्ञोपवीत । सव्यसाची - संज्ञा पुं० श्रर्जुन । सशंक - वि० जिसे शंका हो । भीत । भय- ससिघर - संज्ञा पुं० चंद्रमा । सची - संज्ञा स्त्री० दे० "शची" । ससुर-संज्ञा पुं० पति या पत्नी का पिता । ससुराल - संज्ञा बी० पति या पत्नी के पिता का घर । सस्ता - वि० थोड़े मूल्य का । सस्ताना + - क्रि० म० किसी वस्तु का कम दाम पर बिकना । सस्ती - संथा बी० १. सस्ता होने का भाव । २. वह समय जब कि सब चीज सस्ती मिलें । सह-प्रव्य० सहित । सहकार -संज्ञा पुं० सहायक । सहकारता - संज्ञा स्त्री० सहायता । सहकारिता - संज्ञा स्त्री० सहायता । सहकारी-संज्ञा पुं० सहायक | मदद- गार । 1